
देश में खाद्य उत्पादों के भ्रामक प्रचार और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले दावों पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने 12 प्रमुख फूड ब्रांडों को नोटिस जारी कर उनके उत्पादों पर किए जा रहे स्वास्थ्य संबंधी दावों का जवाब मांगा है।
एफएसएसएआई के अनुसार, कई कंपनियां अपने उत्पादों के लेबल और विज्ञापनों में 100% प्राकृतिक, शुगर-फ्री, हेल्दी और अन्य आकर्षक दावे कर रही हैं, जिनकी वैज्ञानिक पुष्टि स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं और उन्हें उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता के बारे में गलत धारणा दे सकते हैं।
नियामक संस्था ने संबंधित कंपनियों से इन दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि यदि दावे नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं तो उत्पादों की पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापन सामग्री में आवश्यक संशोधन किए जाएं।
एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत किसी भी प्रकार की भ्रामक या अप्रमाणित जानकारी को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं है। उपभोक्ताओं को सही और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना कंपनियों की जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में नेचुरल, हेल्दी और क्लीन फूड जैसे शब्दों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन कई बार इन दावों के पीछे पर्याप्त वैज्ञानिक आधार नहीं होता। ऐसे में एफएसएसएआई की यह कार्रवाई खाद्य उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
एफएसएसएआई ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी ऐसे मामलों की निगरानी जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे खाद्य उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत होगा।













