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Monday, June 22, 2026
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भारतीय नौसेना को मिली नई ताकत, तीन स्वदेशी युद्धपोतों का बेड़े में हुआ शामिल

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भारतीय नौसेना की ताकत में सोमवार को बड़ा इजाफा हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन अत्याधुनिक स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया। इस कदम को भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

नौसेना में शामिल किए गए प्लेटफॉर्म्स में स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस दुनागिरी, लार्ज हाइड्रोग्राफिक सर्वे वेसल आईएनएस संशोधक और एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट आईएनएस आग्रेय शामिल हैं। इन सभी युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण भारत में ही किया गया है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की सफलता को दर्शाता है।

कोलकाता में आयोजित विशेष समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन जहाजों को राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा कि भारत अब रक्षा उपकरणों का केवल आयातक नहीं, बल्कि आधुनिक सैन्य तकनीक और हथियार प्रणालियों का निर्माता भी बन रहा है। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा देश की आर्थिक प्रगति, व्यापारिक हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, नए प्लेटफॉर्म्स के शामिल होने से भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमता, समुद्री क्षेत्र में जागरूकता और पनडुब्बी रोधी अभियानों की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। स्टील्थ तकनीक से लैस आईएनएस दुनागिरी दुश्मन की निगरानी प्रणालियों को चकमा देने और लंबी दूरी तक प्रभावी सैन्य अभियान चलाने में सक्षम है।

वहीं, आईएनएस संशोधक समुद्री सर्वेक्षण, नौवहन मार्गों की मैपिंग और समुद्री अनुसंधान कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दूसरी ओर, आईएनएस आग्रेय को विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विकसित किया गया है, जिससे संवेदनशील समुद्री इलाकों की सुरक्षा और मजबूत होगी।

सरकारी सूत्रों का मानना है कि इन युद्धपोतों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और अधिक मजबूत होगी। साथ ही, यह उपलब्धि रक्षा निर्माण क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी उद्योगों की बढ़ती भागीदारी को भी प्रोत्साहित करेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्वदेशी तकनीक से निर्मित इन आधुनिक युद्धपोतों का नौसेना में शामिल होना न केवल भारत की सैन्य शक्ति को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर देश की रक्षा निर्माण क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी मजबूत संदेश देगा।