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Kisan Andolan: क्या पाकिस्तान के नक्शेकदम पर चलते हुए RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन) का विरोध कर रहे हैं कांग्रेस और किसान आंदोलन से जुड़े नेता ?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन(RSS ) का विरोध कर रहे हैं क्या पाकिस्तान के नक्शेकदम पर चलते हुए कांग्रेस और किसान आंदोलन से जुड़े नेता ?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन (RSS) लगातार पाकिस्तानी हुक्मरानों के निशाने पर रहा है, उसकी दो वजहें हैं पहला तो हिन्दुत्ववादी विचारधारा और दूसरा भारत की जनता के प्रति सेवाभाव, खासतौर पर धर्मविशेष के लोगों के लिए झुकाव। इस्लामिक देश पाकिस्तान के लिए हिन्दुत्व और भारत की बढ़ती ताकत खतरे की घंटी होना कहीं ना कहीं सही भी कही जा सकती है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस और किसान आंदोलन के नेता दोनों की जुबान पर RSS का नाम उसी तर्ज पर आता है, जिसपर पाकिस्तान बोलता आया है। आखिर इसकी क्या वजह हो सकती है ?

 

जुलाई में उज्बेकिस्तान के दौरे पर पहुंचे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से जब भारत को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि वो भारत से बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन भारत में बढ़ता आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वर्चस्व इस बातचीत को होने नहीं देना चाहता। जाहिर है कि इमरान खान ने बतौर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भारतीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपना(पाकिस्तान) दुश्मन बताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इशार साफ था कि ऱाष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन की विचारधारा से पाकिस्तान को जबरदस्त दिक्कत है।

राहुल गांधी की कांग्रेस ने भी RSS ऱाष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन को बताया है दिक्कत

राहुल गांधी भी पिछले काफी समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक सगंठन को लेकर कुछ न कुछ विवादास्पद बयानबाजी करते रहते हैं । मार्च में राहुल गांधी ने ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन की तुलना पाकिस्तान के मदरसों से कर डाली, उन्होंने कहा कि “RSS ने अपने स्कूलों से हमला शुरू किया, जैसे पाकिस्तान के कट्टरपंथी इस्लामिकवादी अपने मदरसों का इस्तेमाल करते हैं, काफी कुछ उसी तरह RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन)  अपने स्कूलों में एक खास तरह की दुनिया दिखाता है। कोई ये नहीं पूछता कि RSS को पैसा कहां से मिलता है ?  सैकड़ों-हजारों स्कूल चलाने के लिए वे मुनाफा कमाने वाले स्कूल नहीं हैं,  इसलिए कोई सवाल नहीं पूछ रहा। ये भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर कब्जा है और उसे उनके हाथों से वापस लेना ही होगा। इसमें मेहनत लगेगी और ये आसान नहीं होने वाला है।”

राहुल गांधी के इस बयान पर काफी बवाल भी हुआ कि 70 वर्ष तक कांग्रेस राज होने के बावजूद, शिक्षा के क्षेत्र में स्वयंसेवी संस्थाओं को जुटने की जरुरत ही क्यों पड़ी। इसके कुछ दिनों बाद ही राहुल गांधी ने 25 मार्च, 2021 को ये भी ट्वीट कर कहा कि मेरा मानना है कि RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन) व संबंधित संगठन को संघ परिवार कहना सही नहीं- परिवार में महिलाएं होती हैं, बुजुर्गों के लिए सम्मान होता, करुणा और स्नेह की भावना होती है- जो RSS में नहीं है। अब RSS को संघ परिवार नहीं कहूंगा। तमिलनाडू में राहुल गांधी ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन पर हमलावर होते हुए कहा कि हम भाजपा और एसएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन) को कुचलकर रख देंगे (We will smash the BJP and the RSS into smithereens)। बात सिर्फ यहीं तक सीमीत नहीं रही,

राहुल गांधी की राष्ट्रवादी विचारधारा वाले से क्या दिक्कत

उन्होंने कांग्रेस में आरएसएस यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसी हिन्दुत्ववादी मानसिकता वालों को पार्टी छोड़ने तक के लिए कह दिया- कि कांग्रेस के बाहर कई लोग हैं, उन्हें अंदर लाओ, जो हमारे यहां डर रहे हैं, उन्हें भगाओ, आरएसएस के हो तो जाओ मजे करो. हमे ऐसे लोगों की पार्टी में जरुरत नहीं है। पार्टी को निडर और हिम्मत वाले लोग चाहिएं, यही हमारी विचारधारा है।

 

जाहिर है कि राहुल गांधी को राष्ट्रवादी विचारधारा वाले आरएसएस संगठन से जबरदस्त दिक्कत हो चुकी है
और वो RSS पर चोट पहुंचाने के लिए कुछ भी बोलने से बाज नहीं आ रहे हैं।
इसी बात का असर पंजाब में राहुल गांधी द्वारा शुरु करवाए गए किसान आंदोलन में भी साफतौर पर दिखलाई पड़ रहा है।

किसान आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन को लेकर पाकिस्तान जैसा विरोध क्यों ?

 

किसान आंदोलन के नेताओं और आंदोलन के चलने में हो रही
बयानबाजी पर नजर डालें तो चाहे पंजाब में हो रही सभाएं हों
फिर सिंघू बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर या कुंडली बॉर्डर के मंच,
हर जगह पर एक सुर में भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से ज्यादा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन लेकर बयानबाजी की जा रही है।
किसान नेता जोगिन्दर उग्राहां, बलबीर राजेवाल समेत तमाम नेता आरएसएस विरोध करते नजर आते हैं।
जाहिर है कि किसान आंदोलन के नेताओं में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन के प्रति उतनी ही नफरत है
जितनी पाकिस्तान के बयानों में दिखलाई पड़ती है।
लेकिन सवाल है क्यों ?

क्या RSS(राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के हिन्दुत्ववादी विचारधारा से हैं दिक्कत ?

कांग्रेस, पाकिस्तान और किसान नेताओं के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन (RSS ) के प्रति एक जैसे विरोधात्मक रवैये को लेकर सवाल उठने लाजमी हैं
कि कहीं उन्हें आरएसएस की हिन्दुत्ववादी विचारधारा से तो दिक्कत नहीं है।
लेकिन अगर आप गौर करेंगे तो पाएंगे
कि आरएसएस में सिर्फ हिन्दूवादी विचारधारा ही नहीं,
बल्कि मुस्लिम समाज के लोग भी बड़ी संख्या में जुड़े हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अंतर्गत एक मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का भी लंबे समय से संचालन किया जा रहा है,
जिसमें लाखों की संख्या में लोग जुड़े हैं ।

आएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी कह चुके हैं कि हिन्दुओं के साथ साथ भारतीय  मुस्लिमों की भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भागीदारी है और इतना ही नहीं उन्होंने कई धार्मिक हिंसा के मुद्दों पर तो ये तक कह दिया है कि जो लोग मोब लिंचिंग करते हैं वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन के सदस्य नहीं हैं। जाहिर है कि आरएसएस का उद्देश्य हिन्दुत्ववादी एजेंडे तक सीमित नहीं है, सर्वधर्म सम्भाव पर फोकस है। तो सवाल है कि आखिर क्यों किसान आंदोलन के नेता, पाकिस्तान और कांग्रेस अध्यक्षा के पुत्र राहुल गांधी एक सुर में आरएसएस का विरोध क्यों कर रहे हैं ?

क्या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर है पाकिस्तान, किसान नेता और कांग्रेस के द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन के विरोध की वजह ?

1947 के बंटवारे से लेकर अब तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन के सदस्यों का कश्मीर को लेकर रुख साफ रहा है,
1947 में मीरपुर में हिन्दुओं और सिक्खों के नरसंहार का मामला हो
फिर पाक अधिकृत कश्मीर में हिन्दुओं और सिक्खों की आबादी के शून्यकरण का मुद्दा,
आऱएसएस लगातार पाकिस्तान के द्वारा हिन्दुओं और सिक्खों पर हुए हमलों के प्रति जन जागरण करती आई है
पीओके के हिस्से वाले कश्मीर को भारत में दोबारा शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध दिखती है । यही वजह है
कि पाकिस्तान के लिए RSS की विचारधारा का प्रचार प्रसार नुकसानदायक साबित हो सकता है,
और वो लगातार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति अनाप शनाप बयानबाजी करता रहता है।

लेकिन ऐसे में सवाल उठने लाजमी हैं कि आखिर कांग्रेस और उसके समर्थित किसान आंदोलन में आखिर राष्ट्रवादी विचारधारा वाली RSS पर हमले क्यों किए जा रहे हैं।
आंदोलन में हो रही हिंसा को लेकर एक बार को ये माना जा सकता है
कि भीड़ का फायदा उठाकर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एजेंट घुस आए हों,
लेकिन जब बलबीर राजेवाल जैसे वरिष्ठ नेता ही आरएसएस पर निशाना साधते हों
तो उनके बारे में क्या कहा जाए।
यही सवाल 52 साल के युवा नेता राहुल गांधी को लेकर भी है
कि आखिर उन्हें हिन्दुत्ववादी, राष्ट्रवादी संगठन RSS से दिक्कत क्यों है
और क्यों वो वैसे ही बोल बोल रहे हैं, जिन्हें पाकिस्तान दशकों से बोलता आया है?
सवाल बहुत हैं लेकिन वक्त का पहिया घूमते घूमते इसका जवाब भी लेकर आएगा,
ठीक उसी तरह जैसे आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लेकर उजागर हुआ था।