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Kisan Andolan : पंजाब में उद्योग, रोजगार पर आंदोलन की मार। व्यापारी कर्ज में डूब रहे, नौकरीपेशा भी बेरोजगार बन नौकरी खोज रहे, जिम्मेदार कौन ?

 पंजाब में उद्योग, रोजगार पर आंदोलन की मार। व्यापारी कर्ज में डूब रहे, नौकरीपेशा भी बेरोजगार बन नौकरी खोज रहे, जिम्मेदार कौन ?

किसान आंदोलन में शुरुआती छह महीनों तक किसान आंदोलन पंजाब में ही केंद्रित रहा, हालात कुछ ऐसे बने कि पंजाब में रेल की रफ्तार थम गई, जगह जगह चक्का जाम हो गया। उद्योगों के लिए कच्चे माल से लेकर तैयार प्रोडक्ट को भेजना चुनौतीजनक बन गया।आंदोलनकारियों के चक्का जाम, बायकाट, तोड़फोड़ और स्टोर बंद करवाने से बड़ी कंपनियों से ज्यादा पंजाब के युवाओं और व्यापारियों को ही ज्यादा नुकसान हो रहा है।

किसान आंदोलन में अंबानी-अडानी से ज्यादा नुकसान पंजाब के व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों पर

पंजाब में रिलायंस जियो के 1500 टावर्स को नुकसान पहुंचाया, 250 से ज्यादा स्टोर्स को बंद करवाया और यही हाल पतंजलि से जुड़े व्यावसायिक दुकानों का भी हुआ। अडानी समूह के गोदामों से लेकर तेल कारखानों तक हर जगह किसान आंदोलनकारियों ने कारोबार को ठप्प करवा दिया, और सड़कों पर माल ले जा रहे ट्रकों को भी रोका गया।

एक बार को कंपनियों के नुकसान को छोड़ भी दें तो एक अनुमान के मुताबिक रिलायंस, जियो, अडानी और पतंजलि समूह से पंजाब में जुड़े 20-25 हजार लोगों की रोजी रोटी पर संकट किसी और की वजह से नहीं, किसान आंदोलन की वजह से ही आ चुका है। कंपनियों ने ज्यादातर आउटलेट पंजाब के व्यापारियों ने ही लिए हुए थे और उसमें फ्रेंचाइजी सिस्टम के तौर पर कार्य कर रहे थे, जाहिर है कि इससे किसी कंपनी का नुकसान तो बाद में हुआ है, पहले पंजाब के आंदोलनकारियों ने अपने ही व्यापारी और नौकरीपेशा लोगों के पैरों पर कुल्हाड़ी मार दी है। सवाल है कि जब बड़े स्तर पर उद्योग बंद होंगे, तो उसका नुकसान किसे होगा ? जिस प्रकार से सारे कार्य फ्रेंचाइज़ी सिस्टम की तर्ज पर चल रहे थे उससे साफ है कि कंपनी का नुकसान कम हुआ है, नुकसान हुआ है पंजाब के व्यापारियों का ।

किसान आंदोलन वालों ने फ्रेंचाइजी बंद करवाई, तो लोन नही चुका पा रहे पंजाब के व्यापारी

पंजाब में रिलायंस स्टोर्स की फ्रेंचाइजी सिस्टम के तहत रिटेल स्टोर्स खोलने वाले व्यापारी पिछले 8 महीनों से सकते में हैं, उनके स्टोर्स को ना तो पंजाब पुलिस खुलवा पा रही है ना ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह। संकट ऐसा है कि कई व्यापारियों ने तो रिटेल स्टोर खोलने और इमारतों के लिए लोन तक लिया हुआ था अब काम धंधे बंद होने से लोन के डिफोल्टर घोषित होने की कगार पर हैं। यही हाल इन स्टोर्स में काम करने वाले लगभग 15 हजार युवाओं का भी है, जब स्टोर ही नहीं खुल पा रहा है तो नौकरी कैसे करें और नौकरी ही नहीं की तो तनख्वाह कैसे मिलेगी, लिहाजा घर पर बैठने को मजबूर हैं।

अडानी विल्मर की फैक्ट्री बंद, सड़ रहा पंजाब का अनाज, बेरोजगार हुए मजदूर, व्यापारी भी बेहाल

फिरोजपुर पंजाब में अडानी की फैक्ट्री को किसान आंदोलनकारियों ने धरना देकर बंद करवा दिया, जिसकी वजह से वहां गोदामों में रक्खा 8572 मीट्रिक टन अनाज सड़ने की कगार पर है। वहीं दूसरी ओर इस फैक्ट्री के बंद होने से हजारों लोगों के लिए रोजगार का संकट पैदा हो चुका है। संकट सिर्फ नौकरियों पर ही नहीं है, पंजाब की ट्रांस्पोर्ट उद्योग को भी इससे नुकसान हुआ है, क्योंकि अनाज को फैक्ट्री तक लाने और फैक्ट्री से बना माल देशभर में पहुंचाने का ज्यादातर काम पंजाब के ही ट्रक कारोबारियों के हाथ में था। अदालत भी इस उद्योग विरोधी संकट पर कई बार पंजाब सरकार को चेता चुकी है, लेकिन कोई हल निकलता दिख नहीं रहा है।

जाहिर है कि पंजाब में किसान आंदोलन के जरिए शुरु हुआ निजीकरण का विरोध पंजाब के ही युवाओं पर आफत बन रहा है। परोक्ष और अपरोक्ष रुप से अंबानी, रिलायंस, जियो और पतंजलि जैसे उद्योगों की ही बात करें तो इनसे पंजाब में एक लाख से ज्यादा लोगों की रोजी रोटी जुड़ी हुई थी, जिसपर कांग्रेस समर्थित किसान आंदोलन की मार पड़नी शुरु हो चुकी है। ऐसे में सवाल ये भी है कि अगर बड़े उद्योगों ने ही पंजाब में निवेश से इनकार करना शुरु कर दिया, तो बेरोजगारी की वजह से पंजाब के बिगड़ते हालात के लिए जिम्मेदार कौन होगा ?