spot_img
HomeEditorialकिसान आंदोलन में चीन को टक्कर देने वाले अंबानी का विरोध, क्या...

किसान आंदोलन में चीन को टक्कर देने वाले अंबानी का विरोध, क्या चीन की साजिश है ?

क्या चीन की साजिश है
चीन को टक्कर देने वाले अंबानी का विरोध,

क्या चीन की साजिश है ?किसान आंदोलन में जियो के टावर तोड़ना, रिलायंस के आउटलेट जबरन बंद करवाना, 5जी की अफवाहें फैलाकर ग्रामीणों को भ्रमित करना, ये सब मुद्दे ऐसे दौर में चल रहे हैं, जब भारत की कंपनी जियो चीन को 5जी के मामले में कड़ी टक्कर दे रही है। शुरुआत में सूत्रों के हवाले से खबर आई कि किसान आंदोलन में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी फायदा उठाने की फिराक में है और अब तो पंजाब के कैप्टन अमरिंदर सिंह भी इस बात पर केंद्र को चिट्ठी लिखते दिख रहे हैं। क्या वाकई चीन पाकिस्तान के जरिए भारत में जियो को नुकसान पहुंचा रहा है, ताकि रिलायंस की मैनेजमेंट का ध्यान भारत में ही फंसा रहे और दूसरे देशों के कॉन्ट्रेक्ट चीन हथिया ले ?

किसान आंदोलन में 5G, जियो और चीन कनेक्शन ?

क्या चीन की साजिश है चीन को टक्कर देने वाले अंबानी का विरोध,

पिछले कुछ महीनों के अंतर्राष्ट्रीय पटल पर मोबाइल और इंटरनेट के क्षेत्र की खबरों पर नजर डालें तो 5 जी इंटरनेट को लेकर दुनिया में एक ही नाम होता था- ह्युआवै। ह्युआवै चीनी सरकार की कंपनी है और यही भारत समेत ब्रिटेन और सभी देशों में 5जी का नेटवर्क लगाने वाली थी। लेकिन कोरोना महामारी के फैलने और चीनी खतरे की आशंका होते ही भारत, ब्रिटेन समेत पूरी दुनिया के देशों ने चीनी कंपनी ह्युआवै को दिए गए 5जी तकनीक के कॉन्ट्रेक्ट रद्द कर दिए । अब सवाल ये था कि क्या दुनिया बिना 5जी के ही रहेगी?

ऐसे में तकनीकी तौर पर कमाल दिखाया भारतीय इंजीनियरों ने और रिलाएंस जियो ने दुनिया की दूसरी सबसे सस्ती और बेहतर 5जी तकनीक विकसित करने का दावा किया। इसकी टेस्टिंग भारत में नहीं,
अमेरिका में महीने भर पहले ही की गई है और रिलाएंस के इस कदम से चीनी के होश उड़े हैं।
अनुमान है कि अगर रिलाएंस जैसी दूसरी कंपनी 5जी के उपकरण एवं टावर लगाने का कॉन्ट्रेक्ट हासिल कर लेती है तो चीन को ह

जारों खरब डॉलर का नुकसान होना तय है ।

दूसरी ओर भारत के लिहाज से बात करें तो अमेरिका में 5जी की टेस्टिंग कर चुकी रिलाएंस को अगर दुनियाभर में 5जी तकनीक के कॉन्ट्रेक्ट मिलते हैं
तो ये भारत को चीन से बड़ा मोबाइल तकनीक हब बना सकता है
और हर साल खबरों डॉलर की कमाई भी भारत में ही पहुंचेगी।

तो कहीं ऐसा तो नहीं कि ह्यूआवै को बचाने के लिए ही रिलाएंस जियो को भारत में कमजोर बनाने की साजिश के तहत किसान आंदोलन में खालिस्तानी एजेंटों के द्वारा जियो बायकॉट का एजेंडा चलाया जा रहा है। ऐसा करने से रिलाएंस जियो कंपनी पर भारत में ही सवालिया निशान लगा सकता है ।  सूत्रों की मानें तो रिलाएंस के कार्यों में तो नुकसान होता नहीं दिख रहा, लेकिन इसे कुछ समय ध्यान भटकाने के लिए ऐसा प्रोपेगेंडा जरुर इस्तेमाल हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक़ टेलिकॉम जैसे संवेदनशील मामलों में अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां विवादों में आई कंपनी को कॉन्ट्रेक्ट देने में जांच के नाम पर देरी कर सकती हैं
और रिलाएंस को भारत में ही घेरकर, चीन ऐसा ही चाहता है।
चीनी कंपनी इन आरोपों का लाभ अपनी बैठकों में भी कर सकता है। रिलाएंस को घर में घेरकर,
चीन विदेशों में नए क़ॉन्ट्रेक्ट हथियाने

किसान आंदोलन में 5G, जियो और चीन कनेक्शन ?

के लिए किसान आंदोलन में जियो को घेरने की साजिश कर रहा है।

आपको बता दें कि किसानों के आंदोलन में रिलाएंस जियो के सिम बायकॉट करने की खबरें उड़ रही हैं
उनमें तर्क दिया जा रहा है
कि फेसबुक के साथ मिलकर रिलाएंस जियो खेतों से सीधी फसल खरीदेगा
और बाजार में सीधे ग्राहकों तक  बेचेगा।

भारत में चीनी 5जी बैन होते ही किसान आंदोलन में उड़ी 5जी रेडिएशन की अफवाहें

भारत में जैसे ही मोदी सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से चीनी कंपनियों और 5जी तकनीक से इनकार किया, उसी दौर में गुरनाम सिंह चढ़ूनी जैसे किसान नेताओं ने 5जी को लेकर अनाप शनाप बयान देने शुरु कर दिए। इन बयाानों में भी खासतौर पर जियो और रिलासंय का ही नाम लेकर कहा गया कि इनकी रेडिएशन से बिमारी फैल रही है।  इस खबर के बाद हरियाणा के कई गांवों में जियो के टावर बंद करवाने की घटनाएं भी हुईं।
लेकिन जब मामला लेकर जूही चावला अदालत पहुंची तो सारे रेडिएशन से बीमारी के दावे धरे के धरे रह गए।
आपको बता दें कि जब ये सारी अफवाहें पूरे देश में फैलाई जा रही थीं
तब तक किसी भी कंपनी ने भारत में सार्वजनिक 5जी टेस्टिंग शुरु भी नहीं की थी ।

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि खेती किसानी और यूरिया,पानी जैसे मुद्दों को छोड़कर किसान नेता बार बार जियो और रिलायंस का विरोध क्यों करते हैं ? क्यों शांतिपूर्ण के नाम पर चल रहा
आंदोलन बार बार स्वदेशी विरोधी और खासतौर पर एक ही मोबाइल कंपनी का विरोधी हो जाता है।
सवाल इसलिए भी उठते हैं कि ऐसा अचानक तभी से शुरु क्यों हुआ,
जब रिलायंस ने 5जी की स्वदेशी तकनीक की घोषणा की?