
सुप्रीम कोर्ट ने बनभूलपुरा हिंसा कांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए मामले के दो मुख्य आरोपियों जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब को मिली डिफॉल्ट बेल रद्द कर दी है। सर्वोच्च अदालत ने दोनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें दोनों आरोपियों को डिफॉल्ट बेल दी गई थी। राज्य सरकार ने विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया।
जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब पर हिंसा भड़काने, साजिश रचने और बड़े पैमाने पर उपद्रव फैलाने जैसे गंभीर आरोप हैं। दोनों के खिलाफ यूएपीए के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने तथ्य और कानून दोनों स्तरों पर गंभीर त्रुटि की। अदालत ने माना कि जांच एजेंसी पर देरी का आरोप उचित नहीं था, क्योंकि मामले की संवेदनशीलता और व्यापकता को देखते हुए जांच तेजी से आगे बढ़ रही थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार 90 दिनों के भीतर 65 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे, जबकि हाईकोर्ट ने केवल 12 गवाहों के बयान दर्ज होने की बात मानकर टिप्पणी की थी।
गौरतलब है कि 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की बड़ी घटना हुई थी। उपद्रवियों ने पुलिस थाने को निशाना बनाया था और पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया था। इस हिंसा में सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद पुलिस ने यूएपीए समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को राज्य सरकार के लिए बड़ी कानूनी सफलता माना जा रहा है। वहीं, मामले को लेकर अब आगे की सुनवाई और जांच प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।













