
अमेरिका और ईरान के बीच कथित शांति समझौते को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, समझौते के बाद बने हालात तेजी से बदल गए हैं और दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। इस घटनाक्रम का असर मध्य-पूर्व की स्थिरता और वैश्विक तेल बाजार पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि ईरान ने इजरायल और लेबनान से जुड़े हालिया घटनाक्रमों को समझौते की शर्तों के उल्लंघन के रूप में देखा है। इसके बाद ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सख्त रुख अपनाने की खबरें सामने आई हैं। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है।
ईरान की ओर से समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर नई फीस लगाने की संभावना की भी चर्चा है। ईरान का तर्क है कि यह सुरक्षा और नेविगेशन सेवाओं के बदले ली जाने वाली राशि होगी, लेकिन खाड़ी देशों ने इस तरह के कदम का विरोध किया है। सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है।
इस बीच, परमाणु कार्यक्रम को लेकर होने वाली संभावित बातचीत पर भी असर पड़ने की खबर है। स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित वार्ता को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। अमेरिका की ओर से भी कड़ा बयान सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाने की बात कही है और चेतावनी दी है कि समझौते की शर्तों का पालन जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। हालांकि स्थिति अभी तेजी से बदल रही है और आगे की घटनाएं इस संकट की दिशा तय करेंगी।













