
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “गुलाम जम्मू-कश्मीर को भारत में वापस लाने जैसी जटिल समस्या का समाधान केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही संभव है।”
एक समाचार माध्यम को दिए साक्षात्कार में डॉ. सिंह ने कहा कि पीओके भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसे लेकर देश का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है। उन्होंने 1994 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित उस ऐतिहासिक प्रस्ताव का भी उल्लेख किया, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग घोषित किया गया था।
मोदी सरकार के नेतृत्व की सराहना
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने क्षेत्र में विकास, सुशासन और शांति स्थापित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनका सकारात्मक असर आम लोगों के जीवन पर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और युवाओं को रोजगार व बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। उनके अनुसार, हाल के वर्षों में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
राष्ट्रीय एकता पर कोई समझौता नहीं
डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के मुद्दे पर केंद्र सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और संवैधानिक संकल्पों के प्रति प्रतिबद्ध है तथा किसी भी चुनौती का मजबूती से सामना करने में सक्षम है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब जम्मू-कश्मीर से जुड़े राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीओके को लेकर दिया गया यह बयान आगामी समय में राष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा संबंधी बहसों को नया आयाम दे सकता है।
हालांकि, इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है, क्योंकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का विषय भारत की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीति से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा माना जाता है।













