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Thursday, February 26, 2026
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हाई कोलेस्ट्रॉल बना ‘साइलेंट किलर’, दिल की सेहत पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

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आज के समय में हाई कोलेस्ट्रॉल देश-दुनिया में तेजी से बढ़ती एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोलेस्ट्रॉल का सीधा असर दिल पर पड़ता है और समय रहते इसे कंट्रोल न किया जाए, तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

दरअसल, हाई कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे शरीर की धमनियों में फैट जमा करने लगता है, जिससे ब्लॉकेज की स्थिति बनती है। खासकर जब बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल (LDL) का स्तर बढ़ता है, तब दिल तक खून पहुंचने में रुकावट आने लगती है। यही कारण है कि डॉक्टर इसे Silent Killer भी कहते हैं, क्योंकि कई बार इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते और पहली बार हार्ट अटैक के दौरान ही इसका पता चलता है।

डाइट निभाती है सबसे अहम भूमिका

हेल्थ एक्सपर्ट्स और डाइटिशियन के मुताबिक, कोलेस्ट्रॉल को नेचुरल तरीके से कम करने में डाइट सबसे बड़ा हथियार है। NCBI में प्रकाशित शोध के अनुसार, शरीर में विटामिन A और विटामिन D की पर्याप्त मात्रा लिवर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है, जिससे कोलेस्ट्रॉल का बैलेंस बना रहता है।

इन 4 फलों से घट सकता है कोलेस्ट्रॉल

सेब – इसे ‘घर का डॉक्टर’ कहा जाता है। इसमें मौजूद पेक्टिन फाइबर बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है और दिल को मजबूत बनाता है।

एवोकाडो – मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स से भरपूर एवोकाडो एलडीएल को घटाने और गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

अंगूर – रेस्वेराट्रॉल नामक एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर अंगूर ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल दोनों को कंट्रोल करने में मददगार है।

केला – घुलनशील फाइबर से भरपूर केला आंतों में कोलेस्ट्रॉल को बांधकर शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल के चेतावनी संकेत
  • चलते समय या सीढ़ियां चढ़ते वक्त सीने में दर्द या दबाव
  • थोड़ी मेहनत में ही सांस फूलना
  • चलने पर पैरों में दर्द या अकड़न
  • सिर दर्द और चक्कर
  • आंखों के आसपास पीले धब्बे (Xanthelasma)
  • बिना ज्यादा काम के भी थकान
  • हाथ-पैर सुन्न होना
कैसे करें पुष्टि?

डॉक्टरों के अनुसार, हाई कोलेस्ट्रॉल की सही पहचान सिर्फ जांच से ही संभव है। इसके लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराया जाता है, जिसमें टोटल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच होती है। आमतौर पर इस टेस्ट से पहले 9 से 12 घंटे का फास्टिंग जरूरी होती है।

एक्सपर्ट की सलाह

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना, तली-भुनी और प्रोसेस्ड चीजों से दूरी बनाना, फल-सब्जियों को डाइट में शामिल करना और रोजाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी अपनाना बेहद जरूरी है।

हाई कोलेस्ट्रॉल को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। समय पर जांच, संतुलित खान-पान और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस साइलेंट किलर से बचाव संभव है।