
गर्मी के मौसम में बढ़ते तापमान के साथ कई लोगों को चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छाना और गर्दन में दर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण अक्सर सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस जैसी समस्याओं से जुड़े होते हैं, लेकिन गर्मियों में ये परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है।
डॉक्टरों का कहना है कि तेज गर्मी के कारण शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो जाता है, जिससे मांसपेशियों के कामकाज और ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है। यही वजह है कि कई बार लोगों को चक्कर या असंतुलन महसूस होता है।
गर्मियों में क्यों बढ़ता है सर्वाइकल दर्द?
गर्मी के दिनों में लाइफस्टाइल में बदलाव इसका बड़ा कारण है। लोग ज्यादा समय घर के अंदर बिताते हैं, जिससे मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बढ़ जाता है। गलत मुद्रा (पोश्चर) में लंबे समय तक बैठने से गर्दन की मांसपेशियों और सर्वाइकल स्पाइन पर दबाव बढ़ता है, जिससे दर्द तेज हो जाता है। इसके अलावा, एसी में लंबे समय तक बैठना और गर्दन पर सीधी ठंडी हवा लगना भी मांसपेशियों में अकड़न पैदा कर सकता है।
क्या है सर्वाइकोजेनिक चक्कर?
जब गर्दन की मांसपेशियां सख्त या खिंच जाती हैं, तो संतुलन बिगड़ने लगता है और चक्कर आते हैं। इसे सर्वाइकोजेनिक चक्कर कहा जाता है। हालांकि हर चक्कर का कारण सर्वाइकल नहीं होता—डिहाइड्रेशन, लो बीपी या ज्यादा गर्मी भी इसके पीछे हो सकते हैं।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अगर बार-बार चक्कर आए, गर्दन में तेज दर्द हो, हाथों में सुन्नपन या संतुलन बनाए रखने में दिक्कत हो—तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
बचाव के आसान तरीके
- पर्याप्त पानी पिएं, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे
- काम करते समय सही मुद्रा बनाए रखें
- हर 30-40 मिनट में ब्रेक लेकर स्ट्रेचिंग करें
- हल्की एक्सरसाइज या योग को दिनचर्या में शामिल करें
- एसी की सीधी हवा से बचें
छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके आप गर्मियों में सर्वाइकल दर्द और चक्कर जैसी समस्याओं से काफी हद तक बच सकते हैं।













