
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक में कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए गए। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को केंद्र की मंजूरी मिलने की रही। केरल विधानसभा से पारित इस प्रस्ताव को अब केंद्र सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे यह औपचारिक प्रक्रिया के अगले चरण में प्रवेश कर गया है।
कैबिनेट बैठक में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कुल 12,236 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को भी हरी झंडी दी गई। सरकार ने रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने, माल ढुलाई को आसान बनाने और हवाई यातायात के विस्तार पर खास जोर दिया है। इसी कड़ी में गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण, पुनारख-किऊल और गम्हरिया-चांदिल रेल खंडों में अतिरिक्त लाइनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही श्रीनगर में नए इंटीग्रेटेड एयरपोर्ट टर्मिनल के निर्माण के लिए भी बजट स्वीकृत किया गया है। अहमदाबाद मेट्रो के फेज-2B के विस्तार को भी कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ सरकार ने कृषि और बिजली क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले भी किए हैं। जूट किसानों को राहत देते हुए 430 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का फैसला लिया गया है, जिससे किसानों की आय को स्थिरता मिलने की उम्मीद है।
सबसे ज्यादा राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा केरल का नाम बदलने के फैसले को लेकर हो रही है। अप्रैल-मई 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस कदम को अहम माना जा रहा है। हालांकि, केंद्र की मंजूरी के बावजूद यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। आगे राष्ट्रपति की सिफारिश के बाद संसद में विधेयक पेश किया जाएगा। लोकसभा और राज्यसभा में साधारण बहुमत से पारित होने के बाद संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन होगा और अंततः राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही राज्य का नया नाम आधिकारिक रूप से लागू होगा।
संवैधानिक रूप से किसी भी राज्य का नाम बदलने का अधिकार संसद के पास है, जो अनुच्छेद 3 के तहत कार्य करती है। इसके लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि यह एक सामान्य विधायी प्रक्रिया होती है। हालांकि, इस प्रक्रिया में राजनीतिक सहमति और समय की भूमिका अहम मानी जाती है।













