
पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 सूत्रीय अमेरिका-ईरान समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जबकि ईरान ने भी समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की पुष्टि की है। इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा
समझौते का सबसे अहम पहलू वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा है। मसौदे के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोलने पर सहमति बनी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के तेल व्यापार की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन माना जाता है। इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति सामान्य होने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
सैन्य तनाव कम करने पर सहमति
समझौते में दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई या बल प्रयोग से बचने का संकल्प लिया है। साथ ही क्षेत्रीय संघर्षों को समाप्त करने और स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाने पर सहमति बनी है। अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का भी वादा किया है।
प्रतिबंधों में राहत का रास्ता साफ
मसौदे के अनुसार अमेरिका ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके अलावा ईरानी तेल निर्यात, बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन से जुड़े प्रतिबंधों में भी राहत देने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलने की संभावना है।
परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का आश्वासन
समझौते में ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। साथ ही संवर्धित यूरेनियम और परमाणु गतिविधियों की निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की देखरेख में किए जाने का प्रस्ताव भी शामिल है। समझौते में ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना का भी उल्लेख किया गया है। दोनों पक्षों के बीच अगले 60 दिनों में इस संबंध में विस्तृत वार्ता होने की संभावना है। दोनों देशों ने अगले 60 दिनों के भीतर व्यापक और स्थायी समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है। इस दौरान युद्धविराम, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर विस्तृत बातचीत जारी रहेगी।
वैश्विक बाजार और भारत को मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ेगी, तेल आपूर्ति सामान्य होगी और ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों, विशेषकर भारत को बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि समझौते के कई प्रावधानों को













