
अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने भारतीय उद्योगपति गौतम अदानी और अन्य के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को वापस लेने के अपने फैसले का अदालत में बचाव किया है। विभाग ने कहा कि यह मामला कानूनी और तथ्यात्मक रूप से कमजोर था तथा इसमें कई गंभीर खामियां थीं, इसलिए इसे आगे बढ़ाना उचित नहीं माना गया।
अदालत में दाखिल अपने जवाब में अमेरिकी न्याय विभाग ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष के पास आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त कानूनी और तथ्यात्मक आधार मौजूद नहीं थे। विभाग के अनुसार, यह मामला मुख्य रूप से विदेश में हुई गतिविधियों से जुड़ा था, जिनका अमेरिकी अधिकार क्षेत्र से सीधा संबंध स्थापित नहीं हो पा रहा था।
DOJ ने यह भी कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और मौजूदा कानूनी स्थिति को देखते हुए मुकदमे में दोष सिद्ध होने की संभावना बेहद कम थी। ऐसे में इस मामले को आगे बढ़ाना न तो न्यायिक दृष्टि से उचित था और न ही व्यावहारिक रूप से आवश्यक।
दरअसल, अमेरिकी अदालत ने न्याय विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा था कि आखिर मामले को वापस लेने का निर्णय किन आधारों पर लिया गया। इसके जवाब में विभाग ने अदालत के समक्ष अपना विस्तृत पक्ष रखा और फैसले को उचित ठहराया।
गौरतलब है कि इस मामले में अदानी समूह पर अमेरिकी निवेशकों से जुड़े कथित धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, अदानी समूह शुरुआत से ही इन सभी आरोपों को निराधार बताते हुए लगातार खारिज करता रहा है।
अब अमेरिकी न्याय विभाग के ताजा रुख के बाद यह मामला कानूनी रूप से लगभग समाप्ति की ओर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।













