
भारत और जापान के बीच होने वाला महत्वपूर्ण वार्षिक शिखर सम्मेलन अब असम के गुवाहाटी की बजाय नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची जुलाई के पहले सप्ताह में भारत दौरे पर आएंगी, जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों नेता आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
पहले इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए गुवाहाटी को चुना गया था और जापानी प्रधानमंत्री के असम दौरे की भी तैयारी चल रही थी। हालांकि, अंतिम समय में कार्यक्रम में बदलाव करते हुए गुवाहाटी यात्रा को रद्द कर दिया गया और पूरे दौरे को नई दिल्ली तक सीमित कर दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, जापानी प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम, सीमित समय और कुछ लॉजिस्टिक कारणों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। जापान की संसद (डाइट) का सत्र जारी होने और अन्य घरेलू जिम्मेदारियों के चलते उनके दौरे को संक्षिप्त रखा गया है। ऐसे में राजधानी से बाहर अतिरिक्त यात्रा को कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया।
असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। राज्य सरकार और उद्योग जगत को उम्मीद थी कि जापानी प्रधानमंत्री की यात्रा से पूर्वोत्तर भारत में निवेश, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर खुलेंगे। हालांकि, सम्मेलन के दिल्ली स्थानांतरित होने से यह संभावना फिलहाल टल गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-जापान शिखर सम्मेलन में सेमीकंडक्टर निर्माण, उच्च तकनीक, हरित ऊर्जा, बुनियादी ढांचा विकास, रक्षा सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने जैसे विषय प्रमुखता से चर्चा में रह सकते हैं। इसके अलावा दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी विचार करेंगे।
बताया जा रहा है कि जापानी उद्योग जगत के कई प्रमुख प्रतिनिधि भी प्रधानमंत्री ताकाइची के साथ भारत आ सकते हैं। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला यह शिखर सम्मेलन दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है।













