
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के इस महत्वपूर्ण मंच पर वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन और उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा को भारत की वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का जमावड़ा
जी7 सम्मेलन में मेजबान फ्रांस के अलावा कनाडा, ब्रिटेन, इटली, जर्मनी, जापान और अमेरिका सहित कई प्रमुख देश भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही कुछ विशेष आमंत्रित देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में मौजूद रहेंगे। ऐसे में यह मंच वैश्विक नीतियों और भविष्य की रणनीतियों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा का केंद्र बनने जा रहा है।
द्विपक्षीय बैठकों पर भी रहेगी नजर
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन मुलाकातों में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बैठकों से भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को और मजबूती मिल सकती है।
वैश्विक चुनौतियों पर भारत का दृष्टिकोण
जी7 सम्मेलन में भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को प्रमुखता से उठाने का प्रयास कर सकता है। खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु वित्त, सतत विकास और डिजिटल समावेशन जैसे मुद्दों पर भारत का पक्ष अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखा जा सकता है। हाल के वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों के हितों को प्रमुखता से उठाया है।
आर्थिक और ऊर्जा सहयोग पर रहेगा फोकस
दुनिया में जारी आर्थिक अनिश्चितताओं और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े संकटों के बीच यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है। भारत ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा निवेश और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के मुद्दों पर भी अपनी बात रख सकता है। इसके अलावा नई तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़े विषय भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जी7 जैसे मंचों पर भारत की लगातार बढ़ती भागीदारी उसकी मजबूत होती वैश्विक भूमिका का संकेत है। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत अब कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर निर्णायक भूमिका निभाता नजर आ रहा है।
जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चाओं और द्विपक्षीय बैठकों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी से भारत को अपनी प्राथमिकताओं और वैश्विक दृष्टिकोण को प्रमुखता से रखने का अवसर मिलेगा। साथ ही कई देशों के साथ सहयोग के नए रास्ते खुलने की भी उम्मीद जताई जा रही है।













