
एक समय था जब मलेरिया को मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा तेजी से बदल रही है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत और अफ्रीका के शहर मलेरिया के नए और बड़े केंद्र बनते जा रहे हैं। जहां एक ओर कुल मामलों में कमी आई है, वहीं शहरी क्षेत्रों में इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
प्रमुख मेडिकल जर्नल The Lancet की रिपोर्ट के अनुसार, शहरों में बढ़ते मलेरिया मामलों के पीछे एक खास मच्छर एनोफिलीज स्टीफेन्सी (Anopheles stephensi) जिम्मेदार है। यह मच्छर साफ पानी में पनपने के लिए पूरी तरह अनुकूलित हो चुका है और घरों की छतों पर बनी टंकियों, कूलर और निर्माण स्थलों में तेजी से फैलता है।
शहर क्यों बन रहे मलेरिया के हॉटस्पॉट?
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई अहम कारण हैं
1. बढ़ती आबादी और भीड़भाड़
शहरी इलाकों में जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भीड़भाड़ वाले और स्लम क्षेत्रों में साफ-सफाई की कमी और खराब जल निकासी के कारण संक्रमण तेजी से फैलता है।
2. क्लाइमेट चेंज का असर
तापमान और नमी में वृद्धि मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है। NCBI की रिपोर्ट बताती है कि शहरों में लंबे समय तक रहने वाली गर्मी और अनियमित बारिश मलेरिया के मामलों को बढ़ावा देती है।
3. लोगों की लापरवाही
कूलर का पानी समय पर न बदलना, घर के आसपास पानी जमा होने देना और मच्छरदानी का उपयोग न करना ये छोटी-छोटी गलतियां मलेरिया के खतरे को बढ़ा देती हैं।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
मलेरिया से बचने के लिए सावधानी बेहद जरूरी है—
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर और टंकी साफ रखें, मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें और पूरे कपड़े पहनें।
- अगर तेज बुखार, ठंड लगना, पसीना आना या सिरदर्द जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
तेजी से बदलते शहरी वातावरण और जलवायु परिस्थितियों के कारण मलेरिया अब केवल गांवों तक सीमित नहीं रहा। ऐसे में शहरों में रहने वाले लोगों को भी उतनी ही सतर्कता बरतने की जरूरत है, ताकि इस खतरनाक बीमारी से बचा जा सके।













