
जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील राजौरी और पुंछ जिलों में आतंकवाद और तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LOC) पर पहली बार अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली लागू की है। सेना ने एलओसी पर स्थित प्रवेश-निकास द्वारों (Entry-Exit Gates) पर एक्स-रे स्कैनिंग मशीनें और आधार आधारित डिजिटल सत्यापन प्रणाली शुरू कर दी है।
राजौरी और पुंछ क्षेत्र लंबे समय से घुसपैठ, हथियारों की तस्करी और आतंकवादी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील माने जाते रहे हैं। एलओसी के पास तारबंदी के आगे भारतीय क्षेत्र में बसे दर्जनों गांवों के लोगों को रोजाना इन गेटों से होकर गुजरना पड़ता है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि कुछ तत्व इन मार्गों का इस्तेमाल आतंकियों तक हथियार और नशीले पदार्थ पहुंचाने के लिए कर रहे थे।
नई व्यवस्था के तहत अब सभी बैग और सामान एक्स-रे स्कैनर से गुजरेंगे, जिससे बिना बैग खोले ही हथियार, विस्फोटक या अन्य संदिग्ध वस्तुओं का पता लगाया जा सकेगा। इसके साथ ही आधार आधारित डिजिटल पहचान प्रणाली के जरिए लोगों की पहचान तत्काल सत्यापित की जाएगी, जिससे सुरक्षा जांच अधिक सटीक और तेज हो सकेगी।
सेना के अधिकारियों के अनुसार यह कदम सीमा पार से होने वाली तस्करी और आतंकी नेटवर्क पर लगाम लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पहले सुरक्षा कर्मियों को लोगों और उनके सामान की मैन्युअल जांच करनी पड़ती थी, जिससे समय भी अधिक लगता था और निगरानी की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बनी रहती थी।
नई तकनीक का लाभ सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों को भी मिलेगा। अब उन्हें लंबी कतारों और बार-बार होने वाली विस्तृत जांच से काफी राहत मिलेगी। डिजिटल सत्यापन और आधुनिक स्कैनिंग व्यवस्था के कारण आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सकेगा।
सेना की पुंछ, भीमबर गली, राजौरी, नौशेरा और सुंदरबनी छावनियों ने इस परियोजना को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि तकनीक आधारित यह पहल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ सीमावर्ती नागरिकों के जीवन को भी आसान बनाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि एलओसी पर आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों का विस्तार आतंकवाद और तस्करी के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाएगा तथा सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगा।













