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Monday, June 1, 2026
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ब्रह्मोस मिसाइल का बढ़ा वैश्विक दबदबा, वियतनाम के बाद इंडोनेशिया से भी डील अंतिम चरण में

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भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का वैश्विक प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जबकि इंडोनेशिया के साथ इसी तरह की डील अंतिम चरण में पहुंच गई है। इसे भारत की रक्षा निर्यात क्षमता और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी बढ़ती रणनीतिक भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।

सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने जानकारी दी कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल सौदा पूरा हो चुका है। हालांकि इसकी औपचारिक घोषणा अभी बाकी है। वहीं, इंडोनेशिया के साथ भी बातचीत अंतिम दौर में है और जल्द ही समझौते पर मुहर लग सकती है।

रक्षा सचिव ने कहा कि भारत अपने विश्वसनीय और मित्र देशों के साथ उन्नत रक्षा तकनीक साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अत्याधुनिक सैन्य तकनीक केवल भरोसेमंद साझेदार देशों को ही उपलब्ध कराई जाती है।

ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से विकसित दुनिया की सबसे तेज परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है। इसकी मारक क्षमता लगभग 390 किलोमीटर तक है और इसे जमीन, समुद्र तथा वायु प्लेटफॉर्म से दागा जा सकता है। अपनी सटीकता और गति के कारण यह दुनिया की सबसे प्रभावशाली मिसाइल प्रणालियों में गिनी जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ होने वाले रक्षा समझौते दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सामरिक उपस्थिति को और मजबूत करेंगे। इससे पहले फिलीपींस भी ब्रह्मोस मिसाइल खरीद चुका है, जिससे भारत के रक्षा निर्यात को नई पहचान मिली है।

जानकारों के अनुसार, वियतनाम के साथ हुआ सौदा लगभग 6,000 करोड़ रुपये का हो सकता है, जिसमें प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सहायता भी शामिल है। चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच इस डील को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में हो रही प्रगति का यह एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। ब्रह्मोस का बढ़ता निर्यात इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत निर्यातक के रूप में भी तेजी से उभर रहा है।