
भारतीय रिज़र्व बैंक ने देश के स्वर्ण भंडार को लेकर नई रणनीतिक दिशा अपनाते हुए विदेशों में सुरक्षित रखे गए सोने को भारत वापस लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसे आर्थिक सुरक्षा, वित्तीय संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के बीच आरबीआई ने 100 टन से अधिक सोना विदेश स्थित भंडारण केंद्रों से भारत वापस मंगाया है। यह सोना पहले मुख्य रूप से ब्रिटेन समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में सुरक्षित रखा गया था। अब इसे चरणबद्ध तरीके से देश के भीतर मौजूद सुरक्षित वॉल्ट्स में स्थानांतरित किया जा रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के बीच कई देश अपने स्वर्ण भंडार को घरेलू नियंत्रण में रखना चाहते हैं। भारत का यह कदम भी इसी वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा माना जा रहा है।
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है। सोना पारंपरिक रूप से आर्थिक संकट के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है और यह मुद्रा स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विश्लेषकों का कहना है कि देश के भीतर सोना रखने से आपात परिस्थितियों में उसका त्वरित उपयोग संभव हो सकेगा। साथ ही विदेशी भंडारण पर निर्भरता कम होने से भारत की वित्तीय संप्रभुता भी और मजबूत होगी।
हालांकि, आरबीआई अब भी अपने स्वर्ण भंडार का एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में बनाए रखे हुए है, ताकि वैश्विक बाजारों में तरलता और लेनदेन की सुविधा प्रभावित न हो।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार के विस्तार के साथ स्वर्ण भंडार प्रबंधन की नीति भी अधिक सक्रिय और रणनीतिक होती जा रही है। आर्थिक जानकार इसे दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक जोखिमों से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।













