हरियाणा के किसानों की इनकम में इजाफा, NCRB के मुताबिक पिछले तीन साल में एक भी हरियाणा किसानों ने नही की आत्महत्या…

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जब भी देश में खेती -किसान की बात होती है तब हरियाणा का नाम जरूर आता है। चाहे किसानों से फसल खरीद का मामला हो या फिर उन्हें सुविधा देने का। किसानो की मेहनत और कृषि समर्थित नीतियों कि वजह से ही हरियाणा ऐसे टॉप 3 सूबों में शामिल है। NCRB के मुताबिक पिछले तीन साल में 17,299 किसानों ने आत्महत्या की है लेकिन इनमें एक भी हरयाणा का नही है। हरियाणा, जिसे भारत की ‘ब्रेड बास्केट’ के रूप में जाना जाता है, पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा ने निवेश बढ़ाने, अनुसंधान और विकास प्रणाली, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सिंचाई विकास, भूमि अधिग्रहण नीति, ऋण और बिजली के उपयोग के लिए सब्सिडी, सड़क, बाजार, बिजली उत्पादन और आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देकर कृषि को मजबूत करने का काम किया है। भारत से बासमती चावल का 60% से अधिक निर्यात हरियाणा से होता है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के दूरदर्शी नेतृत्व में हरियाणा सरकार द्वारा की गई इन पहलों का यह परिणाम है कि हरियाणा उन शीर्ष तीन राज्यों में से एक बन गया है, जहां किसानों की आय 20,000 रुपये प्रति माह से अधिक हो गई है। राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण संगठन (NSSO) के अनुसार, हरियाणा में किसानों की मासिक आय 22841 रुपये हो गई है, जो कि पहले 14434 रुपये थी। हरियाणा सरकार ने अपनी किसान हितैषी पहल के साथ यूपी जैसे अन्य बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया, जहां किसान आय 8061 रुपये दर्ज की गई है । इसी तरह आंध्र प्रदेश में यह 10480 रुपये; महाराष्ट्र में 11492 रुपये और मध्य प्रदेश में 8339 रुपये दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा, “हरियाणा एक ऐसा राज्य है जो न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं, धान, जौ, बाजरा, मूंग, मूंगफली, सरसों, मक्का, उड़द, तिल, चना, अरहर, कपास और सूरजमुखी सहित 14 फसलों की खरीद करता है। पिछले चार साल में सिर्फ गेहूं और चावल बेचकर यहां के किसानों ने 102436 करोड़ रुपये कमाए हैं, मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा देश के पहले राज्यों में है जहां बागवानी के लिए भावांतर भरपाई योजना जैसी विभिन्न किसान कल्याण योजनाएं लागू की गई है।

कई बार कृषि उपज की कम कीमतों के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने 21 बागवानी फसलों को भी भावांतर भराई योजना में शामिल किया है और ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल’ पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। फलों और सब्जियों के दाम बाजार में कीमत से कम होने पर किसानों को नुकसान नहीं होगा। सरकार उस कमी को पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों को कपास, सरसों और गेहूं के लिए लाभकारी मूल्य मिल रहे हैं।