
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने संबंधी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। भारत ने कहा है कि वह इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से आवागमन के लिए किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क स्वीकार नहीं करेगा और मुक्त एवं निर्बाध नौवहन के सिद्धांत का समर्थन करता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और एलएनजी पश्चिम एशियाई देशों से आयात करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क या बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री परिवहन लागत और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
सरकार का कहना है कि वह हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर भी काम किया जा रहा है। इनमें ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाना, रूस सहित अन्य देशों से आपूर्ति बढ़ाना, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का उपयोग करना और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों को मजबूत करना शामिल है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्यों से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाए जाने के प्रस्ताव पर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत ऐसे मार्गों पर सभी देशों के जहाजों को निर्बाध आवाजाही का अधिकार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।













