
पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। 18 जून को हुए युद्धविराम (सीजफायर) के कुछ ही दिनों बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। शुक्रवार रात और शनिवार सुबह दोनों देशों ने एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले किए, जिससे क्षेत्र में हालात फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं।
तनाव की शुरुआत गुरुवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक कार्गो जहाज पर हुए ड्रोन हमले के बाद हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सीजफायर का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के भीतर कथित मिसाइल ठिकानों, ड्रोन लॉन्च साइटों और तटीय रडार केंद्रों पर हवाई हमले किए।
हमलों से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान ने एक नहीं बल्कि कई हमले किए हैं और अमेरिका इसका उचित जवाब देगा। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसकी कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार की रक्षा के लिए की गई।
वहीं, ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में अपनी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के माध्यम से अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करने का दावा किया। साथ ही तेहरान ने सीजफायर के उल्लंघन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना उसका अधिकार है। ईरानी अधिकारियों ने इसे “सीजफायर मैनेजमेंट” का हिस्सा बताया, न कि युद्धविराम का उल्लंघन।
इस बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा और किसी भी विवाद का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक माध्यमों से होना चाहिए।
बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों के बीच सैन्य गलतफहमियों को रोकने के लिए एक प्रत्यक्ष संचार चैनल (डायरेक्ट कम्युनिकेशन लाइन) स्थापित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह व्यवस्था हाल ही में हुई वार्ता के बाद तैयार की गई थी, ताकि किसी भी आकस्मिक टकराव से बचा जा सके।
उधर, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भी तनाव का असर दिखाई देने लगा है। जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और कुछ तेल टैंकरों को अपना मार्ग बदलना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात जल्द नहीं सुधरे, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां जारी हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए तनाव कम करने की अपील की है।












