
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा और पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन के बीच चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। ऊर्जा मंत्री द्वारा पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद शक्ति भवन में हलचल तेज हो गई है। 15 जून को प्रस्तावित मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक से पहले बिजली विभाग के अधिकारी ईंधन अधिभार और संविदा कर्मियों से जुड़ी फाइलों को तैयार करने में जुटे हुए हैं।
दरअसल, ऊर्जा मंत्री ने बिजली उपभोक्ताओं पर लगाए गए 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा कि इस फैसले से पहले उनसे कोई राय नहीं ली गई। इतना ही नहीं, राज्य विद्युत नियामक आयोग ने भी इस अधिभार को नियमों के विपरीत बताया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के बाद इस अधिभार को वापस लेने पर विचार किया जा सकता है। मंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि इस फैसले के कारण जनता में भारी नाराजगी है।
बृहस्पतिवार को सामने आए पत्र में ऊर्जा मंत्री ने अपने ही विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं पावर कॉर्पोरेशन अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म और भ्रष्टाचार के आधार पर कुशल कर्मचारियों को हटाकर अकुशल लोगों की भर्ती की जा रही है। मंत्री ने घटनाक्रम का विस्तार से उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में इस प्रकार के निर्णय शासन की अनुमति के बिना न लिए जाएं और इसे शासन का स्पष्ट निर्देश माना जाए।
इस बीच प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर भी आई है। अब उपभोक्ताओं को उनकी जमा सिक्योरिटी राशि पर 6.50 प्रतिशत ब्याज मिलना शुरू हो गया है। पावर कॉर्पोरेशन ने अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव कर दिए हैं और ब्याज की राशि को बिजली बिलों में समायोजित किया जा रहा है। इससे प्रदेश के करीब 3.73 लाख उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
जानकारी के अनुसार उपभोक्ताओं की कुल जमा सिक्योरिटी राशि लगभग 4,616 करोड़ रुपये है, जिस पर करीब 300 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में लौटाए जाएंगे। हालांकि जून माह के बिजली बिलों में यह समायोजन नहीं हो पाया था, जिस पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद विभाग ने सॉफ्टवेयर अपडेट कर ब्याज समायोजन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन उपभोक्ताओं ने पहले ही अपना बिल जमा कर दिया है, उन्हें यह लाभ जुलाई के बिल में मिलेगा।
अब सभी की निगाहें 15 जून को होने वाली मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक पर टिकी हैं, जहां बिजली विभाग में चल रहे इस विवाद और उपभोक्ताओं से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर बड़ा निर्णय लिया जा सकता है।












