
Japan International Cooperation Agency (जायका) के सहयोग से उत्तराखंड में वन संरक्षण और प्रबंधन को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य में ‘उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन परियोजना’ के दूसरे चरण को जल्द शुरू किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत करीब 1500 करोड़ रुपये है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना अगले 10 वर्षों तक वनों के संरक्षण, वनीकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगी।
उच्च स्तरीय बैठक में बनी रणनीति
इस परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और जायका के भारत प्रमुख टेकुची टकुरो के बीच अहम बैठक हुई। इस दौरान दूसरे चरण के तकनीकी पहलुओं, कार्यान्वयन रणनीति और वित्तीय सहयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। जायका ने राज्य को हरसंभव तकनीकी और आर्थिक मदद देने का भरोसा भी दिया। वहीं वन मंत्री सुबोध उनियाल के साथ भी प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई, जिसमें परियोजना के लक्ष्य और समयसीमा तय करने पर जोर दिया गया।
2014 से जारी है परियोजना का सफर
उत्तराखंड में वन प्रबंधन के लिए इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी, जिसका पहला चरण 807 करोड़ रुपये की लागत से चलाया गया। कोविड-19 के कारण आई बाधाओं के चलते इसकी समयसीमा बढ़ाकर अगस्त 2026 तक कर दी गई थी। अब पहले चरण के पूरा होने से पहले ही दूसरे चरण की तैयारी शुरू कर दी गई है, ताकि काम में कोई रुकावट न आए।
दूसरे चरण में क्या होगा खास?
नई परियोजना के तहत कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:
- वनाग्नि नियंत्रण और मृदा संरक्षण: जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने पर फोकस
- जल स्रोतों का पुनर्जीवन: सूखते जलस्रोतों को फिर से जीवित करने की योजना
- ईको-टूरिज्म को बढ़ावा: ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर
- वन पंचायतों को सशक्त बनाना: स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाना
- सघन वनीकरण: जापानी तकनीक और स्थानीय पौधों के मिश्रण से खाली जमीन पर नए जंगल तैयार करना
पर्यावरण और रोजगार दोनों को मिलेगा लाभ
सरकार का मानना है कि यह परियोजना न केवल राज्य के पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत करेगी, बल्कि वनों पर निर्भर ग्रामीण आबादी की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।यह पहल उत्तराखंड को हरित विकास (Green Development) के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।












