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Wednesday, February 25, 2026
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उत्तराखंड में वोटर लिस्ट शुद्धिकरण तेज, 19 लाख मतदाता बने चिंता का कारण

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उत्तराखंड में मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे प्री-एसआईआर (Pre-SIR) अभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। इस प्रक्रिया के तहत वर्तमान वोटर लिस्ट का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से किया जा रहा है, ताकि फर्जी और दोहरी प्रविष्टियों को हटाया जा सके। हालांकि, शुरुआती आंकड़ों में करीब 19 लाख मतदाताओं की मैपिंग न हो पाना आयोग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
85 लाख में से 19 लाख अब भी बाहर

राज्य में कुल लगभग 85 लाख मतदाता पंजीकृत हैं। पहले चरण में इनमें से करीब 75.28 प्रतिशत, यानी लगभग 65 लाख मतदाताओं की मैपिंग पूरी कर ली गई है। इसके बावजूद करीब 19,79,164 मतदाता ऐसे हैं, जिनकी मैपिंग बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की कोशिशों के बाद भी नहीं हो सकी है। इन्हीं मतदाताओं को लेकर अब दूसरे चरण में विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

1 से 15 फरवरी तक दूसरा चरण

निर्वाचन आयोग ने 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक प्री-एसआईआर अभियान का दूसरा चरण शुरू किया है। इस चरण में उन मतदाताओं पर फोकस किया जा रहा है जो घर पर नहीं मिले या जिनके पास 2003 की मतदाता सूची से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। आयोग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक मतदाताओं का सत्यापन पूरा किया जा सके।

मैदानी जिले सबसे पीछे

मैपिंग के मामले में मैदानी जिले सबसे पीछे चल रहे हैं। देहरादून में अब तक केवल 57 प्रतिशत और ऊधमसिंह नगर में 59 प्रतिशत मैपिंग ही हो पाई है। अधिकारियों के अनुसार, इन जिलों में बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाता होने के कारण सत्यापन में दिक्कत आ रही है।

किन कारणों से कट सकता है नाम?

यदि कोई मतदाता अपनी मैपिंग नहीं कराता है या 2003 की सूची से उसका लिंक स्थापित नहीं हो पाता, तो उसे अपात्र माना जा सकता है। इसके अलावा, जिन मतदाताओं का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है, उन्हें डुप्लीकेट मानकर हटाया जा सकता है। सर्विस वोटर और दूसरे राज्यों से आकर बसे लोगों को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।

मतदाताओं के लिए जरूरी सलाह

निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि यदि उनके घर अभी तक बीएलओ नहीं पहुंचे हैं, तो वे स्वयं अपने बूथ लेवल ऑफिसर से संपर्क करें। आधार कार्ड के साथ पुराने वोटर आईडी या 2003 के आसपास के निवास प्रमाण पत्र उपलब्ध हों तो उन्हें जरूर दिखाएं। दूसरे चरण में खासतौर पर 18–19 वर्ष के युवाओं और विवाहित महिलाओं की मैपिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

निर्वाचन अधिकारी की सख्त चेतावनी

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो मतदाता सत्यापन में सहयोग नहीं करेंगे या जिनका वेरिफिकेशन नहीं हो पाएगा, उनका नाम आगामी अंतिम मतदाता सूची से बाहर किया जा सकता है।