
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने ब्रिक्स देशों से वैश्विक मुद्दों पर अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को न्याय की आवाज बनना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर फिलिस्तीन के मुद्दे और फिलिस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार की रक्षा को वैश्विक शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता और वैधता की बड़ी परीक्षा बताया।
पेज़ेश्कियान ने कहा कि फिलिस्तीन के मामले में ब्रिक्स को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उनके मुताबिक, दुनिया की मौजूदा व्यवस्था की विश्वसनीयता इस बात से भी तय होगी कि वह फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों और आत्मनिर्णय के सवाल पर कितना प्रभावी रुख अपनाती है।
गाजा में युद्धविराम और मानवीय सहायता पर जोर
ब्रिक्स सम्मेलन में जारी नई दिल्ली घोषणापत्र में भी फिलिस्तीन के मुद्दे को जगह दी गई है। इसमें गाजा में युद्धविराम बनाए रखने और प्रभावित लोगों तक मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की गई है। ईरानी राष्ट्रपति ने इसी संदर्भ में ब्रिक्स की भूमिका को और मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि समूह को वैश्विक स्तर पर न्याय, संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की आवाज को मजबूत करना चाहिए।
ब्रिक्स सम्मेलन में पेज़ेश्कियान ने ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे ठिकानों को हमलों और धमकियों से सुरक्षित रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, इन सुविधाओं पर किसी भी तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा कर सकती है।
उन्होंने कहा कि टिकाऊ सुरक्षा तभी संभव है, जब सभी देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान किया जाए। उन्होंने ‘कुछ के लिए सुरक्षा और दूसरों के लिए असुरक्षा’ के मॉडल को खारिज करने की जरूरत बताई।
ईरान पर प्रतिबंधों के खिलाफ व्यावहारिक कदम की मांग
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने देश पर लगाए गए प्रतिबंधों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एकतरफा और अमानवीय प्रतिबंधों का सामना करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाना ब्रिक्स सदस्य देशों की प्राथमिकता होनी चाहिए। पेज़ेश्कियान के बयान से साफ है कि ईरान ब्रिक्स को केवल आर्थिक सहयोग के मंच तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर भी प्रभावी भूमिका निभाने वाला समूह बनाना चाहता है। फिलिस्तीन, परमाणु प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, राष्ट्रीय संप्रभुता और प्रतिबंधों जैसे मुद्दों को उठाकर ईरान ने सम्मेलन में अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं।












