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Sunday, February 15, 2026
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‘सुदर्शन चक्र’ बना भारत का S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, दुश्मन की हर साजिश होगी ध्वस्त

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भारतीय वायुसीमा अब पहले से कहीं ज़्यादा सुरक्षित हो गई है, और इसकी बड़ी वजह है S-400 ‘ट्रायम्फ’ एयर डिफेंस सिस्टम। मल्टी-टारगेट एंगेजमेंट क्षमता से लैस यह घातक हथियार प्रणाली पाकिस्तान समेत किसी भी दुश्मन देश के एयर डिफेंस सिस्टम को पीछे छोड़ने में सक्षम है। रूस निर्मित इस प्रणाली को न केवल तकनीक का चमत्कार माना जाता है, बल्कि यह भारत की रक्षा नीति में गेमचेंजर साबित हो रही है।

क्या है S-400?

S-400 ‘ट्रायम्फ’ एक उन्नत सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जिसे रूस ने विकसित किया है। यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन, लड़ाकू विमान, मिसाइल और यहां तक कि रॉकेट लॉन्चर जैसे खतरों का पता लगाकर उन्हें नष्ट कर सकती है। इसकी रडार प्रणाली 600 किलोमीटर की दूरी तक निगरानी कर सकती है, जबकि इसकी मिसाइलें 40 से 400 किलोमीटर तक सटीक वार कर सकती हैं। एक बार में यह 80 लक्ष्यों को ट्रैक और तबाह करने की क्षमता रखती है।

भारत ने वर्ष 2018 में रूस के साथ 5.4 अरब डॉलर (लगभग 40 हजार करोड़ रुपये) की डील के तहत पांच S-400 सिस्टम्स खरीदने का करार किया था। यह रक्षा समझौता भारत के इतिहास में सबसे बड़े सौदों में से एक है। अब तक भारत को इस प्रणाली की कुछ यूनिट्स की डिलीवरी मिल चुकी है और शेष की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है।

बिजली-सी तैनाती, पलटवार में चौंका देने वाली तेजी

S-400 की खासियत न केवल इसकी मारक क्षमता है, बल्कि इसकी तैनाती की गति भी इसे असाधारण बनाती है। इसे किसी भी स्थान पर महज 5 से 10 मिनट में तैनात किया जा सकता है। यह सिस्टम मल्टीफंक्शनल रडार, कमांड यूनिट और विभिन्न रेंज की मिसाइलों से लैस होता है, जो एक साथ कई दिशाओं से आने वाले हवाई खतरों को पहचान कर जवाब दे सकता है।

कौन-कौन हैं S-400 के मालिक?

दुनियाभर में केवल चार देशों के पास ही यह अत्याधुनिक प्रणाली है—रूस, चीन, भारत और तुर्की। इससे स्पष्ट होता है कि S-400 केवल एक हथियार नहीं, बल्कि एक सामरिक शक्ति है जिसे चुनिंदा राष्ट्र ही हासिल कर पाए हैं।

S-400 को ‘सुदर्शन चक्र’ की संज्ञा देना महज प्रतीकात्मक नहीं है। जिस प्रकार महाभारत में भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र शत्रुओं का संहार करता था, उसी तरह यह आधुनिक चक्र भी भारत के दुश्मनों की हर हवाई चाल को पल भर में ध्वस्त करने की शक्ति रखता है। यह प्रणाली अब न केवल भारतीय वायुसीमा की रक्षा कर रही है, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर एक एयर डिफेंस सुपरपावर के रूप में स्थापित कर रही है।