
उत्तराखंड में उच्च शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। नई व्यवस्था को इसी सेमेस्टर से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, पारंपरिक कॉपी जांच प्रणाली में देरी, त्रुटियों और पारदर्शिता से जुड़े सवालों को देखते हुए डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने का फैसला लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को पहले स्कैन किया जाएगा और फिर परीक्षक ऑनलाइन माध्यम से उनका मूल्यांकन करेंगे।
परिणाम जल्दी और अधिक पारदर्शी
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू होने से परीक्षा परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया तेज होगी और मानवीय त्रुटियों की संभावना भी कम हो जाएगी। इससे छात्रों को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन का लाभ मिलेगा। इसके अलावा उत्तर पुस्तिकाओं का पूरा डेटा सुरक्षित सर्वर पर संरक्षित रहेगा, जिससे कॉपियों की सुरक्षा भी बेहतर हो सकेगी।
परीक्षकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
नई व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करने के लिए तकनीकी ढांचा तैयार किया जा रहा है। परीक्षकों को डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के उपयोग का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। विश्वविद्यालय स्तर पर स्कैनिंग केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां उत्तर पुस्तिकाओं को डिजिटाइज किया जाएगा।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल प्रणाली लागू होने से मूल्यांकन में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और छात्रों को समय पर परीक्षा परिणाम मिल सकेंगे। साथ ही कॉपियों के भौतिक परिवहन की आवश्यकता समाप्त होने से प्रशासनिक खर्च में भी कमी आएगी।
उच्च शिक्षा में तकनीकी सुधार की बड़ी पहल
सरकार का मानना है कि यह कदम उच्च शिक्षा में तकनीकी सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। आने वाले समय में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह स्मार्ट और डिजिटल बनाने की दिशा में यह व्यवस्था अहम भूमिका निभाएगी।













