
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की जोरदार दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।
क्या है मामला?
यह एफआईआर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की शिकायत पर दर्ज की गई थी। आरोप है कि पवन खेड़ा ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यह दावा किया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं। इस बयान को उन्होंने मान हानिकारक और निराधार बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान खेड़ा के वकीलों ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत को बताया कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए असम पुलिस के करीब 60 पुलिसकर्मी उनके आवास पर पहुंचे थे, जिसे उन्होंने असामान्य और अत्यधिक कदम बताया। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि यह मामला राजनीतिक बयानबाजी से जुड़ा है और इसे आपराधिक मामला बनाकर गिरफ्तारी करना उचित नहीं है।
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय करेगा।













