
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक जंग अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) तक पहुंच गई है। सोमवार को हुई अहम बैठक में रूस ने खुलकर ईरान का समर्थन किया और पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका पर तीखे आरोप लगाए।
संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी प्रतिनिधि वसीली नेबेंजिया ने कहा कि अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के मद्देनजर होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही को नियंत्रित करने का अधिकार ईरान को है। उन्होंने पश्चिमी देशों की कार्रवाइयों को ‘समुद्री डकैती’ बताते हुए अमेरिका पर पाखंड का आरोप लगाया।
इसी बीच कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की। इस दौरान पुतिन ने ईरानी जनता की “वीरता” की सराहना करते हुए कहा कि रूस इस कठिन समय में ईरान के साथ मजबूती से खड़ा है।
रूस ने इस संकट के बीच शांति की पहल भी की है। रूसी मीडिया एजेंसी तास के अनुसार, मॉस्को पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने और शांति वार्ता शुरू कराने के लिए मध्यस्थता करने को तैयार है।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान पहले भी संकेत दे चुका है कि अगर उसके हितों पर असर पड़ा, तो वह इस मार्ग को बाधित कर सकता है। ऐसे में रूस का समर्थन वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।













