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Tuesday, April 28, 2026
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नेपाल का 100 रुपये सीमा वाला नियम आम लोगों के लिया बना चिंता का कारण, भारत ने दिया बयान

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भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने रोटी-बेटी के रिश्ते और खुली सीमा की परंपरा के बीच नेपाल सरकार के नए कस्टम नियम ने सीमावर्ती इलाकों में हलचल मचा दी है। इस फैसले का असर अब साफ तौर पर व्यापार, आम लोगों की जिंदगी और दोनों देशों के सामाजिक संबंधों पर दिखने लगा है।

हाल ही में नेपाल प्रशासन ने एक पुराने नियम को सख्ती से लागू करते हुए यह तय किया है कि यदि कोई नेपाली नागरिक भारत से 100 नेपाली रुपये (NPR) से अधिक का सामान लेकर अपने देश में प्रवेश करता है, तो उसे सीमा शुल्क देना होगा। इतनी कम सीमा तय होने से अब रोजमर्रा के सामान जैसे दवाएं, कपड़े, किराना ले जाना भी मुश्किल और महंगा हो गया है।

इस पूरे मामले पर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को इस घटनाक्रम की जानकारी है और नेपाल द्वारा नियम के सख्त पालन की रिपोर्ट मिली है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सीमावर्ती लोगों को हो रही असुविधाओं को समझता है। हालांकि, इसे नेपाल का आंतरिक निर्णय बताया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि इस फैसले का विरोध खुद नेपाल के अंदर ही शुरू हो गया है। वीरगंज और भैरहवा जैसे सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय नागरिकों ने नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि वे वर्षों से भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं और अब हर छोटी चीज पर टैक्स लगने से उनकी दैनिक जिंदगी प्रभावित हो रही है।

इसका असर भारतीय बाजारों में भी साफ दिख रहा है। रक्सौल, जोगबनी और सोनौली जैसे क्षेत्रों में व्यापारियों का कहना है कि नेपाली ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। सीमा पर कड़ी जांच और मामूली सामान पर शुल्क वसूली के कारण लोग खरीदारी से बच रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के नियम लंबे समय तक जारी रहे, तो यह केवल व्यापार ही नहीं बल्कि भारत-नेपाल के बीच दशकों पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों पर भी असर डाल सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों के लोगों को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए जल्द ही कोई संतुलित समाधान निकलेगा।