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Tuesday, October 13, 2026
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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, न्यायिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों पर उठाए सवाल

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भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में कानून के शासन पर चर्चा के दौरान पाकिस्तान पर तीखा पलटवार किया। भारत ने पाकिस्तान में न्यायिक स्वतंत्रता, मानवाधिकारों, अल्पसंख्यकों की स्थिति और प्रेस की आजादी को लेकर सवाल उठाए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान को दूसरे देशों पर टिप्पणी करने से पहले अपने यहां कानून के शासन की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।

पाकिस्तान के संवैधानिक संशोधन पर उठाए सवाल

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की काउंसलर आर. मैथिली ने पाकिस्तान के 26वें संवैधानिक संशोधन का उल्लेख करते हुए इसे न्यायिक स्वतंत्रता के लिए झटका बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान में सैन्य नेतृत्व को न्यायिक जांच से बाहर रखने और न्यायपालिका पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं।

भारत ने कहा कि कानून के शासन की बात तभी सार्थक है, जब देश की संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम करें और कानून सभी पर समान रूप से लागू हो।

भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में बंदी और उनके साथ कथित व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। भारत ने पाकिस्तान में राजनीतिक दलों के सामने आने वाली चुनौतियों, नागरिकों पर सैन्य अदालतों में मुकदमे चलाने और मानवाधिकारों पर प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई।

भारत ने पाकिस्तान से अपने नागरिकों की आवाज सुनने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की अपील की।

अल्पसंख्यकों और प्रेस की आजादी पर सवाल

भारत ने पाकिस्तान की ओर से भारतीय अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया। भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और प्रेस की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाते हुए वहां मीडिया के कामकाज से जुड़ी पाबंदियों पर सवाल किए।

भारत ने पाकिस्तान की विदेशी मीडिया संबंधी नई दिशानिर्देशों का उल्लेख करते हुए पूछा कि ऐसी परिस्थितियों में स्वतंत्र पत्रकारिता कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।

ऑपरेशन सिंदूर का भी किया जिक्र

भारत ने मई 2025 में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का बचाव करते हुए इसे पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में की गई लक्षित कार्रवाई बताया। भारतीय पक्ष के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य आतंकी ढांचे को निशाना बनाना था।

संयुक्त राष्ट्र में हुई इस चर्चा के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच कानून के शासन, मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर मतभेद एक बार फिर सामने आए। दोनों देशों के आरोपों और दावों के बीच इन मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कूटनीतिक बहस जारी है।