
चुनावी धांधली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले INDI गठबंधन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से साफ इनकार कर दिया है।
याचिका के जरिए कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि विपक्ष जिन मुद्दों को उठाना चाहता है, उन्हें प्रशासनिक स्तर पर मिलने के बजाय उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत औपचारिक याचिका दाखिल करके अदालत के सामने रखना चाहिए।
CJI ने ईमेल के जरिए भेजे गए जवाब में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल से इस तरह प्रशासनिक रूप से मुलाकात करने की कोई व्यवस्था नहीं है। अदालत का मुख्य कार्य याचिकाओं पर सुनवाई करना और कानून के अनुसार निर्णय देना है। साथ ही, उन्होंने यह भी दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे देश के सभी नागरिकों के लिए खुले हैं और अदालत मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की थी तैयारी
इससे पहले, विपक्षी दलों की योजना सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालकर मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने की थी। इसके लिए विपक्षी नेताओं ने शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस प्रस्तावित मार्च में विपक्षी दलों और नागरिक समाज के लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष
INDI गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इन तमाम मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है।
अदालत के इस रुख के बाद, चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद और अधिक तेज होने के पूरे आसार हैं। हालांकि, चुनावी धांधली को लेकर लगाए गए ये आरोप फिलहाल विपक्ष के दावे हैं, जिनकी सत्यता की पुष्टि केवल निर्धारित कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही हो सकती है।













