
जातीय हिंसा और लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता के बाद मणिपुर में एक बार फिर लोकतांत्रिक सरकार की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति ने राज्य से तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति शासन हटा लिया है। इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज कर दी है और राज्यपाल से मुलाकात कर बहुमत का औपचारिक दावा पेश किया है।
केंद्र की मंजूरी के बाद बड़ा फैसला
पिछले वर्ष मई में भड़की हिंसा के बाद मणिपुर में अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। गृह मंत्रालय की हालिया रिपोर्टों में सुरक्षा हालात में सुधार और स्थिति के धीरे-धीरे सामान्य होने का हवाला दिया गया, जिसके आधार पर राष्ट्रपति शासन हटाने का निर्णय लिया गया। केंद्र सरकार का मानना है कि निर्वाचित सरकार के जरिए ही शांति बहाली और विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है।
भाजपा ने पेश किया बहुमत का दावा
राष्ट्रपति शासन हटते ही भाजपा ने अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर राजभवन में सरकार बनाने का दावा पेश किया। पार्टी का कहना है कि उसके पास विधानसभा में बहुमत का आवश्यक आंकड़ा मौजूद है और कुछ निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है। हालांकि मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस पर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा और शपथ ग्रहण समारोह जल्द हो सकता है।
शांति बहाली होगी प्राथमिकता
सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद भाजपा नेताओं ने कहा कि नई सरकार की पहली प्राथमिकता राज्य में स्थायी शांति बहाल करना होगी। हिंसा के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास, कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और सामान्य जनजीवन को पटरी पर लाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां
मणिपुर में नई सरकार के गठन के साथ ही कई कठिन चुनौतियां सामने होंगी। कुकी और मैतेई समुदायों के बीच विश्वास बहाली, हिंसा में प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास, अवैध हथियारों की बरामदगी और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत करना सरकार के लिए बड़ी परीक्षा साबित होगा।
विपक्ष ने उठाए सवाल
राष्ट्रपति शासन हटाने के फैसले पर विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस सहित अन्य दलों का कहना है कि राज्य में हालात पूरी तरह सामान्य होने से पहले यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार गठन से पहले सभी विधायकों की परेड कराकर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
भाजपा प्रदेश नेतृत्व का कहना है कि राष्ट्रपति शासन हटना लोकतंत्र की जीत है और पार्टी राज्य को स्थिरता, शांति और विकास की राह पर आगे ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।













