
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए एक वीडियो संदेश और लेख जारी किया है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए महिलाओं की भागीदारी को मुख्यधारा में लाना बेहद जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का महत्वपूर्ण कदम बताते हुए सभी राजनीतिक दलों से इसे मिलकर आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि विधायिका में महिलाओं को आरक्षण देना केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि समानता और जनभागीदारी बढ़ाने का बड़ा अवसर है। इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को उचित स्थान मिलेगा और लोकतंत्र और मजबूत होगा।
अपने लेख में प्रधानमंत्री ने बी. आर. अंबेडकर और ज्योतिबा फुले को नमन करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण उनके सामाजिक न्याय और समानता के विचारों को आगे बढ़ाने का कार्य है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज महिलाएं विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता, खेल, कला और सशस्त्र बलों सहित हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शासन और नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से निर्णय अधिक संतुलित और प्रभावी होते हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सितंबर 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को अब पूरी तरह लागू करने की जरूरत है, ताकि आने वाले चुनावों में महिलाएं इसका लाभ उठा सकें। प्रधानमंत्री ने अंत में सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे राजनीति से ऊपर उठकर इस पहल का समर्थन करें, क्योंकि यह पूरे देश के भविष्य और विकास से जुड़ा विषय है।












