
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर देखने को मिला है। वार्ता विफल होने की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे बाजार में एक बार फिर अस्थिरता बढ़ गई है।
तेल की कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी
वार्ता टूटने के कुछ ही घंटों के भीतर कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ गए। अमेरिकी कच्चा तेल करीब 8 प्रतिशत उछलकर 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत भी 100 डॉलर के पार निकल गई। यह बढ़ोतरी बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत मानी जा रही है।
नौसैनिक घेराबंदी से बढ़ा तनाव
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी की घोषणा कर दी। इस कदम से तेल आपूर्ति पर संकट की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो वैश्विक बाजार में तेल की कमी और महंगाई दोनों बढ़ सकती हैं।
बाजार में डर और अफरा-तफरी का माहौल
शांति की उम्मीदें टूटने के बाद निवेशकों में घबराहट देखी जा रही है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण तेल उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे बाजार में खरीदारी का दबाव बढ़ गया है।
भारत पर पड़ सकता है असर
कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी का असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ेगा, जो तेल आयात पर निर्भर हैं। आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है।













