केदारनाथ धाम में चार दिनों से बर्फबारी, सफेद चादर में ढकी केदारपुरी; मैदानी इलाकों में शीतलहर का कहर

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उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का मिजाज लगातार तल्ख बना हुआ है। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में पिछले चार दिनों से रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। लगातार हिमपात के चलते केदारपुरी पूरी तरह सफेद चादर में ढकी नजर आ रही है, जबकि इसका असर निचले इलाकों और मैदानी जिलों तक साफ दिखाई देने लगा है।

केदारनाथ धाम में जमी दो से तीन फीट तक बर्फ

पिछले 96 घंटों से केदारनाथ धाम में मौसम खराब बना हुआ है। मंदिर परिसर, पैदल मार्ग और आसपास की ऊंची चोटियों पर दो से तीन फीट तक बर्फ जमा हो चुकी है। लगातार बर्फबारी के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। न्यूनतम तापमान शून्य से 5 से 10 डिग्री नीचे तक पहुंच गया है, जिससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है। बर्फ जमने से पुनर्निर्माण कार्य आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं, वहीं धाम में तैनात सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को आवाजाही में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मैदानी इलाकों में शीतलहर और ठिठुरन बढ़ी

पहाड़ों में हो रही बर्फबारी का सीधा असर उत्तराखंड के मैदानी और निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है—

  • देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और ऊधमसिंह नगर में बर्फीली हवाओं से ठिठुरन बढ़ गई है।
  • सुबह और शाम के समय घना कोहरा छा रहा है, जिससे दृश्यता कम हो गई है और यातायात प्रभावित हो रहा है।
  • कड़ाके की ठंड के कारण शाम ढलते ही बाजारों में सन्नाटा पसरने लगा है। लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं।
प्रशासन अलर्ट, लोगों से सतर्क रहने की अपील

मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिलाधिकारियों ने नगर निगम और संबंधित विभागों को सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाने, रैन बसेरों में पर्याप्त व्यवस्था करने और जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और हृदय व सांस के रोगियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि अचानक बढ़ी ठंड से उनकी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

अगले 48 घंटे भी चुनौतीपूर्ण

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों तक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में शीत दिवस (Cold Day) की स्थिति बनी रह सकती है। चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी हिमपात की भी संभावना जताई गई है।