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Thursday, October 29, 2026
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रूस-यूक्रेन युद्ध से भारतीय रक्षा उद्योग को बड़ा फायदा, यूरोप को गोला-बारूद निर्यात में 1600% से अधिक की बढ़ोतरी

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रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय देशों में हथियारों और गोला-बारूद की बढ़ती मांग का फायदा भारतीय रक्षा उद्योग को मिला है। पिछले चार वर्षों में भारत ने यूरोपीय देशों को करीब 87.2 करोड़ डॉलर यानी लगभग 7,800 करोड़ रुपये मूल्य के गोला-बारूद और संबंधित उत्पादों का निर्यात किया है। युद्ध से पहले के चार वर्षों में यह आंकड़ा केवल 4.92 करोड़ डॉलर था। इस तरह भारतीय गोला-बारूद के निर्यात में 1,600 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

यूरोप में बढ़ती सैन्य जरूरतों ने भारतीय रक्षा कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। इससे भारत की वैश्विक रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में मौजूदगी मजबूत होने के साथ-साथ देश के रक्षा निर्यात को भी गति मिली है।

यूरोप के 13 देशों में भारतीय रक्षा उत्पादों की बढ़ी मांग

व्यापार आंकड़ों के अनुसार, भारत मध्य और पूर्वी यूरोप के 13 देशों को गोला-बारूद और संबंधित उत्पादों की आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। इस क्षेत्र में दक्षिण कोरिया पहले स्थान पर है। पहले भारत इस सूची में 28वें स्थान पर था।

पोलैंड, रोमानिया, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया, बुल्गारिया, क्रोएशिया और स्लोवेनिया जैसे देशों में भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग बढ़ी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोपीय देशों को अपने सैन्य भंडार मजबूत करने और इस्तेमाल किए गए गोला-बारूद की भरपाई करने की जरूरत पड़ी है। इसके अलावा, यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के कारण भी यूरोप में गोला-बारूद की मांग बढ़ी है।

तोप के गोलों से लेकर विस्फोटकों तक की आपूर्ति

भारत से यूरोपीय देशों को मुख्य रूप से तोपों के गोले, मोर्टार गोले, छोटे कैलिबर के गोला-बारूद, प्रोपेलेंट और विस्फोटक जैसे उत्पादों का निर्यात किया जा रहा है। यह निर्यात मुख्य रूप से गोला-बारूद और उससे संबंधित उत्पादों पर केंद्रित है, न कि लड़ाकू विमानों या मिसाइलों की बिक्री पर।

भारत की सरकारी और निजी रक्षा कंपनियां इस मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यूरोपीय देशों की ओर से रक्षा क्षमता बढ़ाने और सैन्य उत्पादन में निवेश करने की योजनाओं से भारतीय कंपनियों के लिए कारोबार के नए रास्ते खुले हैं।

भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

भारत के समग्र रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा निर्यात बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 23,622 करोड़ रुपये था।

भारत अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पादों की आपूर्ति कर रहा है। यह वृद्धि देश में रक्षा विनिर्माण क्षमता के विस्तार और घरेलू कंपनियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।

भारतीय रक्षा उद्योग के सामने नए अवसर

यूरोप में गोला-बारूद की बढ़ती मांग भारत के लिए रक्षा विनिर्माण और निर्यात को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इससे घरेलू कंपनियों को नए बाजार मिल सकते हैं और देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है।

हालांकि, सैन्य उत्पादों के निर्यात के साथ उनके अंतिम उपयोग और निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने की निगरानी भी महत्वपूर्ण है। भारत को अपने पारंपरिक रक्षा संबंधों और बदलते अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक अवसरों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

कुल मिलाकर, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में बढ़ी सैन्य जरूरतों ने भारतीय रक्षा उद्योग के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। निर्यात में हुई तेज वृद्धि भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।