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Friday, May 15, 2026
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योगी आदित्यनाथ ने जताई पलायन पर चिंता, बोले- खाली होते गांव हमारी संस्कृति के लिए खतरा

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योगी आदित्यनाथ ने उत्तराखंड में बढ़ते पलायन और बंजर होते खेतों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि पलायन केवल खेती को प्रभावित नहीं कर रहा, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपराओं और पूर्वजों की विरासत को भी धीरे-धीरे समाप्त कर रहा है।

योगी आदित्यनाथ अपने पैतृक गांव पंचूर में आयोजित श्री विष्णु पंचदेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि लोग अपने गांव, जमीन और सांस्कृतिक पहचान से दूर होते जा रहे हैं, जो भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

बंजर होते खेतों पर जताई चिंता

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो खेत कभी फसलों से लहलहाते थे, आज वे झाड़ियों से भर चुके हैं। कई गांवों में स्थिति ऐसी हो गई है कि खेतों में एक दाना अन्न तक पैदा नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि लोग खेती छोड़ने का कारण जंगली जानवरों को बताते हैं, लेकिन पहले भी गांवों में जंगली जानवर होते थे। उस समय लोग अधिक जागरूक और खेती से जुड़े रहते थे।

उन्होंने किसानों को खेती के नए विकल्प अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि यदि पारंपरिक फसलें नुकसान झेल रही हैं तो लोगों को बागवानी की ओर बढ़ना चाहिए। योगी ने बताया कि पंचूर के पास स्थित पोखरी गांव में बाबा रामदेव द्वारा खुमानी, आड़ू और किन्नू जैसे फलों का सफल उत्पादन किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को नई प्रेरणा मिल रही है।

मंदिर निर्माण से जुड़ा रोचक प्रसंग सुनाया

योगी आदित्यनाथ ने मंदिर निर्माण से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर आज विष्णु पंचदेव मंदिर बना है, वहां पहले सड़क निर्माण किया जा रहा था, लेकिन काम के दौरान बार-बार जेसीबी मशीन खराब हो रही थी।

उन्होंने कहा कि जब ग्रामीणों ने उनसे इस बारे में जानकारी साझा की तो उन्होंने पुराने मानचित्र और उस स्थान का इतिहास देखा। तब पता चला कि वहां पहले एक प्राचीन देवस्थल हुआ करता था, जहां ग्रामीण पूजा-अर्चना किया करते थे। इसके बाद सड़क की दिशा बदलने का निर्णय लिया गया और मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया।

योगी ने बताया कि इसके बाद सड़क निर्माण बिना किसी बाधा के पूरा हो गया और न तो कोई मशीन खराब हुई और न ही किसी मजदूर को नुकसान पहुंचा। उन्होंने इसे आस्था और दैवीय शक्तियों के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया।

‘जागर’ परंपरा के खत्म होने पर चिंता

मुख्यमंत्री ने गांवों में कम होती धार्मिक परंपराओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बचपन में गांवों में साल में एक बार जागर जरूर होता था, लेकिन अब यह परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं को जागृत रखने और सांस्कृतिक चेतना बनाए रखने के लिए जागर जैसी परंपराओं का जीवित रहना जरूरी है। योगी ने बताया कि पंचूर गांव में नृसिंह भगवान मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया है और वहां नियमित पूजा-अर्चना होनी चाहिए।

योगी आदित्यनाथ ने लोगों से अपनी सांस्कृतिक विरासत, देवस्थलों और परंपराओं को संरक्षित रखने का आह्वान करते हुए कहा कि जब खेत हरे-भरे रहेंगे और गांव आबाद रहेंगे, तभी हमारी संस्कृति और पहचान भी सुरक्षित रह पाएगी।