क्या उद्योग विरोधी शक्ल लेता जा रहा है कांग्रेस – वामपंथी मिलन, केरल से इंडस्ट्री बाहर, पंजाब में भी चल रहा उद्योग विरोधी आंदोलन

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केरल से परेशान होकर उद्योगपति ने निवेश रद्द किया, पंजाब में किसान आंदोलन के बीच उद्योगों का काम करना मुश्किल,

काइटेक्स ग्रुप ने केरल में काम में दिक्कतों के बाद केरल छोड़ दिया है,
यही हाल पंजाब का भी है, जहां पिछले एक वर्ष से किसान आंदोलन के नाम पर उद्योगों और उद्योगपतियों का विरोध चल रहा है,बायकॉट,
चक्का जाम से लेकर स्टोर्स खोलने तक की मनाही के बीच उद्योगपतियों ने पंजाब को नकार दिया तो क्या होगा ?

अन्ना काइटेक्स ग्रुप ने जैसे ही केरल में कामकाज में हो रही परेशानी को लेकर
केरल से परेशान होकर निवेश रद्द करने का ऐलान किया,
काइटेक्स ग्रुप के शेयर भावों में 16 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई।
जाहिर है कि कहीं ना कहीं निवेशकों ने भी केरल काइटेक्स ग्रुप के केरल छोड़ने के निर्णय का स्वागत किया
और उन्हें उम्मीद बंधी की अब ये एक्सपोर्ट वाली कंपनी अपने रेवेन्यू और कामों में सुधार कर ऊंची छलांग लगाएगी।

क्या उद्योग नहीं चलने देता कांग्रेस गठबंधन ? गंभीर आरोप

काइटेक्स ग्रुप ने जिस तरह से केरल में  लॉकडाउन खुलने के बाद सरकारी विभागों द्वारा एक-एक कर इन्स्पेक्शन के नाम पर दबिश दी, उससे जाहिर है कि कंपनी अधिकारी चाहकर भी अपनी प्रोडक्शन कैपेसिटी को नहीं बढ़ा पाए,
क्योंकि उनका अच्छा खासा समय तो इनस्पेक्शन अधिकारियों के साथ ही बीत गया। ऐसे में सरकार पर सवाल उठने लाजमी भी हैं।
लेकिन पंजाब में तो हालात उससे भी बदतर दिखाई पड़ रहे हैं

पंजाब में कांग्रेस की सरकार, उद्योग क्यों हो रहे लाचार ?

मुख्यंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को बेहतर छवी वाला नेता माना जाता है,
लेकिन पिछले एक वर्ष से जिस प्रकार कांग्रेस और सीपीएम ने पंजाब में किसान आंदोलन का ग्राउंड तैयार कर कृषि बिल का विरोध करना शुरु किया है
उससे पंजाब में उद्योगों की हालत पस्त होनी तय थी।
हालात तब और बिगड़े जब चक्का जाम, रेल रोको के साथ साथ निजी कंपनियों का बायकॉट ही नहीं,
उनके संस्थानों पर ताला लगवाना शुरु कर दिया।

पंजाब में दिसंबर से नहीं खुल पाए मॉल और स्टोर्स

पंजाब में दिसंबर माह में जो किसान आंदोलन के नाम पर मोबाइल टावरों और दुकानों मे तोड़फोड़ का सिलसिला शुरु हुआवो 8 महीने बीतने के बाद भी बदस्तूर जारी है। हाल ही में रिलायंस स्टोर्स के मालिकों ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से मुलाकात कर उनसे स्टोर्स खुलवाने की अपील की, लेकिन अभी तक हालात जस के तस हैं,रिलायंस स्टोर्स ही नहीं पतंजलि जैसी स्वदेशी कंपनी भी किसान आंदोलनकारियों की चपेट में है किसान किसान आंदोलन को सीधा समर्थन कांग्रेस और वामपंथी दोनों की ओर से मिल रहा है।

राहुल गांधी ने शुरु किया था उद्योगपतियों का बहिष्कार

पंजाब में जून 2020 में राहुल गांधी ने ट्रैक्टर रैली कर मोदी सरकार& उद्योगों और कृषि बिल का विरोध करने का आवाहन किया था,
जिसके बाद सीपीएम और कांग्रेस की काडर ने भारतीय किसान यूनियन के साथ मिलकर गांव गांव प्रचार प्रसार किया,
सभाएं की और नतीजतन अक्टूबर, नवंबर के बाद किसान आंदोलनकारियों ने पंजाब में औद्योगिक विकास का रॉडब्लॉक खड़ा कर दिया।

उद्योगों ने पंजाब को छोड़ा, तो स्थिती भयावह होगी ?
देशभर में उद्योगिक विकास के मामले में पंजाब का नंबर बहुत नीचे आता है, बेरोजगारी दर भी तेजी से बड़ रही है, ऐसे में जिस प्रकार से कांग्रेस, वामपंथियों के सहयोग से चल रहे किसान आंदोलन के दौरान पंजाब सरकार उद्योगों और व्यापारियों को सुरक्षा और सुविधा देने में नाकाम होती दिखाई पड़ रही है। किसान आंदोलन की वजह से रिलायंस जैसी कंपनियों के शोरुम और स्टोर्स 8 महीनों से बंद पड़े  हैं, फ्रैंचाइज़ी के यहां काम कर रहे 15 से 20 हजार लोग बेरोजगारी की कगार पर हैं, मॉल बनाने वाले बिल्डर और स्टोर फ्रैंचाइज़ी भी लोन की किश्तें नहीं चुका पा रहे हैं।

यही हाल उत्पादनकर्ताओं का भी है, हाईवे जाम होने और आंदोलनकारियो द्वारा फैक्ट्रियों के इर्द गिर्द पर बार बार प्रदर्शन करने की वजह से उद्योगों को आर्थिक, मानसिक दोनों तरह का नुकसान हो रहा है।
लागत बढ़ने से देश ही नहीं, विदेशों में भी कंपीटिशन में टिकना मुश्किल हो रहा है।
ऐसे में अगर दिक्कतें यूं ही बनी रहीं और पंजाब से उद्योगों और उद्योगपतियों ने पलायन की सोच बना ली,
पंजाब छोड़ दिया तो पंजाब में बेरोजगारी विकराल रूप धर सकती है।