
नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक सुरक्षा काफिले को लेकर बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री ने स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) को निर्देश दिया है कि उनके काफिले में शामिल वाहनों की संख्या लगभग 50 प्रतिशत तक कम की जाए।
सुरक्षा से समझौता नहीं, व्यवस्था होगी अधिक प्रभावी
सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किए बिना उसे अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और सभी जरूरी सुरक्षा प्रोटोकॉल पहले की तरह लागू रहेंगे।
तकनीकी निगरानी के कारण लिया गया फैसला
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने स्वयं सुरक्षा एजेंसियों से मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने को कहा था। समीक्षा के दौरान पाया गया कि आधुनिक तकनीकी निगरानी, उन्नत संचार प्रणाली और हाई-टेक सुरक्षा संसाधनों के चलते कम वाहनों के साथ भी सुरक्षा मानकों को बनाए रखा जा सकता है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि काफिले के आकार में कमी आने से यातायात बाधा कम होगी और आम नागरिकों को होने वाली असुविधा में राहत मिलेगी। साथ ही वीआईपी मूवमेंट को अधिक सुगम और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया के कई देशों में शीर्ष नेताओं के काफिले तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था के कारण अपेक्षाकृत छोटे रखे जाते हैं। भारत में भी सुरक्षा ढांचे के आधुनिकीकरण के साथ यह बदलाव नई प्रशासनिक सोच का संकेत माना जा रहा है।
हालांकि सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा बहु-स्तरीय बनी रहेगी और खुफिया एजेंसियों की निगरानी पहले की तरह जारी रहेगी।
इस फैसले को प्रशासनिक दक्षता, जनसुविधा और आधुनिक सुरक्षा प्रबंधन के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।













