17.6 C
New York
Wednesday, January 21, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
Home news जानें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई विधि के लाभ..

जानें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई विधि के लाभ..

15

ड्रिप सिंचाई – अगर किसान खेत में साधारण सिंचाई के बजाय ड्रिप सिंचाई विधि का प्रयोग करे तो तीन गुना ज्यादा क्षेत्र में उतने ही पानी में सिंचाई कर सकते हैं। ड्रिप सिंचाई का प्रयोग सभी फसलों की सिंचाई में करते हैं, लेकिन बागवानी में इसका प्रयोग ज्यादा अच्छे से होता है। बागवानी में जैसे केला, पपीता, नींबू जैसी फसलों में सफलतापूर्वक करते हैं। बागवानी की तरह ही ड्रिप सिंचाई विधि का प्रयोग गन्ना और सब्जियों में भी कर सकते हैं।Image result for ड्रिप सिंचाईड्रिप सिंचाई से लाभ- ड्रिप सिंचाई में पेड़ पौधों को नियमित जरुरी मात्रा में पानी मिलता रहता है ड्रिप सिंचाई विधि से उत्पादकता में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक लाभ मिलता है। इस विधि से 60 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। इस विधि से ऊंची-नीची जमीन पर सामान्य रुप से पानी पहुंचता है। इसमें सभी पोषक तत्व सीधे पानी से पौधों के जड़ों तक पहुंचाया जाता है तो अतिरिक्त पोषक तत्व बेकार नहीं जाता, जिससे उत्पादकता में वृद्धि होती है। इस विधि में पानी सीधा जड़ों तक पहुंचाया जाता है और आस-पास की जमीन सूखी रहती है, जिससे खरपतवार भी नहीं पनपते हैं। ड्रिप सिंचाई में जड़ को छोड़कर सभी भाग सूखा रहता है, जिससे खरपतवार नहीं उगते हैं, निराई-गुड़ाई का खर्च भी बच जाता है।

फव्वारा (स्प्रिंकल) सिंचाई – स्प्रिंकल विधि से सिंचाई में पानी को छिड़काव के रूप में किया जाता है, जिससे पानी पौधों पर बारिश की बूंदों की तरह पड़ता है। पानी की बचत और उत्पादकता के हिसाब से स्प्रिंकल विधि ज्यादा उपयोगी मानी जाती है। ये सिंचाई तकनीक ज्यादा लाभदायक साबित हो रहा है। चना, सरसो और दलहनी फसलों के लिए ये विधि उपयोगी मानी जाती है। सिंचाई के दौरान ही पानी में दवा मिला दी जाती है, जो पौधे की जड़ में जाती है। ऐसा करने पर पानी की बर्बादी नहीं होती।जानें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई विधि के लाभ..स्प्रिंकल विधि से लाभ – इस विधि से पानी वर्षा की बूदों की तरह फसलों पर पड़ता है, जिससे खेत में जलभराव नहीं होता है। जिस जगह में खेत ऊंचे-नीचे होते हैं वहां पर सिंचाई कर सकते हैं। इस विधि से सिंचाई करने पर मिट्टी में नमी बनी रहती है और सभी पौधों को एक समान पानी मिलता रहता है। इसमें भी सिंचाई के साथ ही उर्वरक, कीटनाशक आदि को छिड़काव हो जाता है। पानी की कमीं वाले क्षेत्रों में विधि लाभदायक साबित हो रही है।