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Kisan Andolan: पंजाब में दशकों से चलती आ रही है, अब भी जारी है कॉन्ट्रक्ट फार्मिंग, तो विरोध क्यों ?


Kisan Andolan
पंजाब में दशकों से चलती आ रही है, अब भी जारी है कॉन्ट्रक्ट फार्मिंग, तो विरोध क्यों ?

Kisan Andolan पंजाब में दशकों से चलती आ रही है, अब भी जारी है कॉन्ट्रक्ट फार्मिंग, तो विरोध क्यों ? –खेती और कारोबार दोनों का गठजोड़ ही आर्थिक तरक्की की राह आसान करता है और लंबे समय से इसका उदाहरण भी पंजाब में ही देखने को मिलता है। पंजाब में आईटीसी, पेप्सिको, भारती एंटरप्राइज़ेज और पंजाब एग्रो जैसी कई कंपनियां हैं, जो लंबे समय से आलू, टमाटर, मक्की जैसी फसलों की कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग करवा रही हैं और इससे पंजाब के किसानों से लेकर व्यापारियों तक सभी को अलग अलग तरह से फायदा मिला है।

कृषि बिल में किसानों के कॉन्ट्रेक्ट खेती की राह आसान हुई तो पंजाब में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत लगभग सभी यूपीए के घटक दलों ने विरोध शुरु कर दिया, पिछले एक साल से कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग जैसे कानूनों को काला कानून बताकर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है और बीते 8 महीनों से दिल्ली के बॉर्डर जाम हैं। लेकिन जब पंजाब की गहराई से जांच करें तो खेती की खुशहाली में एमएसपी के साथ साथ कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग भी एक बड़ी वजह दिखलाई पड़ती है।

पंजाब में 90 के दशक से चली आ रही कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग, पेप्सिको से हुई थी शुरुआत

Kisan Andolan:पंजाब में कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली विदेशी कंपनी पेप्सिको पिछले तीन दशकों से कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग के प्रारुप को चला रही है। 90 के दशक में पंजाब में पेप्सिको ने अपने प्लांट पंजाब में लगाए और पंजाब सरकार से मेमोरेंडम साइन किया। इस मेमोरेंडम के मुताबिक पेप्सिको को पंजाब के किसानों से खरीदने के लिए अनुबंध किया गया ताकि पंजाब के किसनों की आमदनी पढ़ सके। पंजाब के होशियारपुर में पेप्सिको ने अपना प्लांट लगाकर किसानों से टमाटर और मिर्च की खरीदारी शुरु की। आपको बता दें
कि पिज्जा हट जैसे संस्थानों को टोमेटो सॉस (Tomato Ketchup) इत्यादी की सप्लाई पेप्सिको के जरिए ही की जाती थी।

पेप्सिको के कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग की वजह से अधिक गुणवत्ता और उत्पादन वाले टमाटरों की खेती का भी पंजाब में खूब प्रचार प्रसार हुआ और पंजाब में बनी सॉस का जायका भारत के बड़े बड़े पिज्जा हट जैसे संस्थानों से होते हुए घर घऱ तक पहुंचा। इससे किसानों और मालिकों को तो अपनी फसल की निश्चित दाम पर खरीदी की गारंटी तो मिली ही साथ ही साथ युवाओं को भी ट्रांस्पोर्टेशन, सर्वे और फैक्ट्री में काम करने से रोजगार प्राप्त हुआ। अनुमान के मुताबिक पेप्सिको रोजाना लगभग 600 टन टमाटरों की खरीदी करती थी। जाहिर है कि पंजाब में ही अगर इतनी बड़ी मात्रा में रोजाना खपत हो तो किसानों को फसल बिक्री कर फायदा ही होगा।
लेकिन बाद में ये प्लांट बंद करने की नौबत आन पड़ी।

भारती एंटरप्राइजिज भी करती है पंजाब में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग मक्की और टमाटर की फसल खरीद किसानों को देती है फायदा

पंजाब में साल 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने कॉन्ट्रेक्ट फॉर्मिंग के लिए भारती एंटरप्राइजेज (एयरटेल ग्रुप) का लाडोवाल में Field Fesh का प्रोजेक्ट शुरु करवाया । इस प्रोजेक्ट के तहत पंजाब के किसानो से मक्की और टमाटर की खरीदी का कार्य शुरु हुआ। आपको बता दें कि फील्ड फ्रेश के तहत DelMonte के क्वालिटी प्रोडक्ट्स को तैयार किए जाते हैं और इनकी मांग भारत ही नहीं, बल्कि दूर विदेशों में भी खूब है। इस प्रोजेक्ट की कंपनी FieldFresh Foods Private Limited, Bharti Enterprises और विदेशी कंपनी Del Monte Pacific Limited का संयुक्त उपक्रम है ।
इस उपक्रम के तहत पंजाब के किसानों को गुणवत्ता वाले बीज और खाद उपलब्ध करवाए जाते हैं

डेलमोन्ट और भारती समूह

कॉन्ट्रेक्ट खेती के तहत उनसे फसलें खरीदकर उनकी प्रोसेसिंग की जाती हैं। डेलमोन्ट और भारती समूह के इस प्रोजेक्ट में पंजाब के किसानों से टमाटर और मक्की की खूब खरीदी की जाती है, इस कंपनी की अति गुणवत्ता वाली टोमेटो सॉस आज ज्यादातर बड़े संस्थानों को सप्लाई की जाती है। और विदेशों में भी खूब सप्लाई होती है। पंजाब की सॉस के साथ ही मक्की से बना Delmonte Corn भी भारत के साथ साथ विदेशों में भी सप्लाई होता है।
एक अनुमान के मुताबिक कंपनी लगभग सैंकड़ों टन माल ब्रिटेन जैसे यूरोपिय देशों में भी सप्लाई करती है।
कंपनी की क्वालिटी और कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग में ट्रांस्पेरेंसी ही शायद वजह है
कि इसे लेकर कभी ना तो किसी किसान ने शिकायत की ना ही किसी व्यवसायी ने।

जाहिर है कि पंजाब में अरसे से चली आ रही
कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग पंजाब के किसानों के लिए फायदे का सौदा रही है
और इसे शुरु करवाने का श्रेय भी कांग्रेस को ही जाता है।
तो ऐसे में सवाल उठने लाजमी हैं
कि आखिर अब क्यों कांग्रेस सत्ता में होने के बावजूद पंजाब में ही नहीं,
बल्की पूरे देश में कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग का विरोध कर रही है।
क्या इसकी वजह सिर्फ राजनीतिक है या कुछ और ?