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Saturday, January 17, 2026
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वो 10 बातें जिनके कारण किसान आंदोनकारियों से नाराज हो रहा है हर वर्ग

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वो 10 बातें जिनके कारण किसान आंदोनकारियों से नाराज हो रहा है हर वर्ग

बीते कुछ दिनों में किसान आंदोलन के नाम पर जिस तरह की मनमानी आंदोलनकारियों ने की है उससे न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट बल्कि आम जनता के नजर में भी किसानों की नकारात्मक छवि में बढ़ोतरी हुई है। आम लोगों को भी कहीं न कहीं ये बात समझ आने लगी है कि किसानों के नाम पर आंदोलन करने वाले इन संगठन को न तो किसानों से कोई वास्ता है और न ही आम जनता से कोई सरोकार। अपनी जिद पर अड़े ये किसान नेता जनता की परेशानियों को कुछ नहीं समझते। किसान आंदोलन की वजह से आम जनता किस तरह की परेशानियों से गुजर रही है, आईए जानते हैं..

 1 उद्योगों पर चोट, जनता की आर्थिक हालत बिगड़ी

आंदोलन के नाम पर कुछ लोगों की अराजकता का दुष्परिणाम है कि कई शहरों के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र बंद हो गए हैं या बंद होने के कगार पर हैं। इसका खामियाजा राज्य के ही कई किसानों व उद्यमियों को भी भुगतना पड़ रहा है। पंजाब और हरियाणा में लगभग 25 MSME हैं जो 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देने वाले 45 लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार देते हैं, इनमें से 9 हजार से ज्यादा औद्योगिक युनिट आंदोलन की वजह से बंद होने के कगार पर हैं। ऐसे में यहां काम करने वालों के भविष्य पर भी खतरा है। किसानों के आंदोलन के कारण तीसरी तिमाही में लगभग 70,000 करोड़ रुपये से भी अधिक का आर्थिक नुकसान देश को हुआ है।

  1.  बेरोजगारी और लाचारी की वजह बनता किसान आंदोलन

युवा बेरोजगार हो गए हैं, अनेक श्रमिकों का कामकाज छिन गया है। हैरानी इस बात की है कि धरना-प्रदर्शन करने वाले कुछ किसान नेता यह भी नहीं देख रहे कि जिनका रोजगार छिन रहा है, वे युवा भी किसान परिवारों से ही हैं। पंजाब में बात करें तो उद्योगों को 500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है, रिलायंस रिटेल, पेट्रोल पंप, पतंजलि स्टोर और अडानी के लॉजिस्टिक हब और गोदाम बंद होने से भी हजारों बेरोजगार हुए हैं। वहीं बहादुरगढ़ के इर्द गिर्द इंडस्ट्रियल एरिया 7.5 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार के लाले पड़े हैं।

  1. रोज आवाजाही करने वाले नौकरीपेशा लोग और छात्र परेशान

दिल्ली की सीमाओं पर रहने वाले औऱ रोजाना काम या पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली आने जाने वाले लोग जगह जगह हो रहे धरना प्रदर्शनों और बंद सड़कों की वजह से परेशान हैं, इस जाम की वजह से लोगों को लंबा समय ट्रैफिक में बीत रहा है। किसान आंदोलन के चलते दिल्ली एनसीआर का ट्रैफिक काफी समय से बदहाल है। सिंघु और टीकरी बॉर्डर बंद हैं। वहीं गाजीपुर बॉर्डर भी फिलहाल एक तरफ से बंद है। यहां दिल्ली की तरफ आने वाला रास्ता बंद है। नोएडा की रहने वाली मोनिका अग्रवाल अग्रवाल ने याचिका दायर कर कहा है कि पहले दिल्ली पहुंचने में 20 मिनट का समय लगता था और अब उन्हें दो घंटे लगते हैं। जिसके उपर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए किसानों के ऊपर नाराजगी भी जाहिर की है।

  1. किसान आंदोलनकारियों की वजह से महिलाओं का घर से बाहर निकलना मुश्किल हुआ

किसान आंदोलन में आपराधिक छवि के लोगों के शामिल होने के आऱोप लगते रहे हैं। जी न्यूज के स्टिंग ऑपरेशन में इन असामाजिक तत्वों की वेश्यावृति जैसे कृत्यों में संलिप्तता उजागर हुई है। बांकीपुर गांव के ब्लाक समिति सदस्य सतीश कुमार ने आंदोलनकारियों पर संपर्क मार्ग बंद करके उनको कैद करने और नशा कर रातभर ट्रैक्टरों को गांवों में  दौड़ाने और  मनमानी करने का आरोप लगाया था। साथ महिलाओं से रेप, यौन उत्पीड़न की घटनाएं भी सामने आई हैं ऐसे में गांवों में बहन-बेटियों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।

  1. ग्रामीणों से छोटी सी बात होने पर कत्ल जैसी संगीन घटनाएं

सोनीपत के एक ग्रामीण रामनिवास पर बैरिकेड्स के बगल से गाड़ी निकालने को लेकर आंदोलनकारियों ने जानलेवा हमला कर दिया था जिसमें किसी तरह उसने दुकान में छिपकर अपनी जान बचाई थी। ग्रामीणों पर हमले का यह पहला मामला नहीं था। इससे पहले भी आंदोलन में शामिल लोगों द्वारा ग्रामीणों पर तलवार से हमला किया गया था।

  1. खुद लाखों ग्रामीण किसानों को हो रही है असुविधा

दिल्ली से अन्य राज्यों की तरफ जाने वाले कई मार्ग अभी भी बंद पड़े हैं। देश की राजधानी दिल्ली की कई सीमाओं पर किसान महीनों से डेरा डाले हुए हैं, जिससे खुद किसानों को ही कहीं और ले जाकर फसल बेचने में असुविधा हो रही है।

  1. 7. ट्रांसपोर्ट के काम में लगे लोगों को भारी नुकसान

किसान आंदोलन की वजह से महीनों से राजधानी दिल्ली में सड़क यातायात प्रभावित है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट के काम में लगे लोगों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है और अबतक हजारों लोग बेरोजगार हो चुके हैं।

 

 

  1. 8. ट्रैफिक जाम की वजह से जनता की जेब पर बोझ और प्रदूषण का भी खतरा

महीनों से राजधानी दिल्ली के आसपास लगने वाले भारी जाम से की वजह से लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ जाम में फंसने पर पेट्रोल का नुकसान होता है तो वही दूसरी तरफ प्रदूषण का भी खतरा काफी बढ़ गया है,जिससे वृद्धजनों और सांस के मरीजों की समस्याओं में इजाफा होने की संभावना है।

  1. 9. राष्ट्रीय संपत्ति और संसाधनों का नुकसान

26 जनवरी को दिल्ली में जो हिंसा हुई उसके बाद लगा था कि आंदोलनकारी अब कोई भी ऐसा कार्य नहीं करेंगे, लेकिन हरियाणा और पंजाब में सरकारी कार्यों को बाधित करने की खबरें रोज आती रहती हैं। भारत बंद के दौरान किसान नेताओं ने कहीं हाईवे रोक रक्खे हैं, कहीं रेल रोको आंदोलन शुरु हो जाता है, इससे जाहिर है कि उन्हें जनता की परेशानी से कोई फर्क नहीं पड़ता है। ऐसे आंदोलनों से न सिर्फ जनता की परेशानी बढ़ती है बल्कि साथ साथ राष्ट्रीय संपत्ति और संसाधनों का भी नुकसान होता है। अगर सिर्फ 26 जनवरी की ही बात करें तो दिल्ली किसान आंदोलनकारियों के द्वारा हुई हिंसा में के दौरान कुल 299 पुलिस कर्मी घायल हुए थे। दंगाइयों द्वारा दिल्ली भर में लगभग 42 लाख रुपये के कुल 236 लोहे के बैरिकेड्स को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था, कुल 11 डीटीसी बसें क्षतिग्रस्त,जिसमें लगभग 1.98 करोड़ का नुकसान हुआ था।

 

  1. लोकतंत्र के चारों स्तंभ पर सवालिया निशान उठा रहे किसान आंदोलनकारी

किसानों आंदोनकारी भारतीय लोकतंत्र के चारों स्तंभों पर ही एक एक कर सवालिया निशान लगाते जा रहे हैं। । पहली स्तंभ विधायिका के बनाए कानून को काला कानून बताकर विरोध किया। दूसरे स्तंभ कार्यपालिका के अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें ही दोषी करार दिया । देश के तीसरे और सबसे पवित्र माने जाने वाले स्तंभ न्यायपालिका के आदेश की भी अवमानना की। और अंत में चौथे स्तंभ मीडिया के प्रति भी इनका रवैया अपमानजनक ही रहा।