spot_img
Homenews'जिअ हो बिहार क लाला,‘खोल द सीलिंग का ताला’

‘जिअ हो बिहार क लाला,‘खोल द सीलिंग का ताला’

यूं तो तिवारी की ललतरानी से हम सब वाकिफ हैं। भीड़ भरे माहौल में अध्यक्ष जी की टोली मानो होली खेल रही थी। शटर देखते ही जड़ दिए हथौड़ा!
टूट गया ताला, खुश हो गया लाला, मगर घंटी बंध गई बेचारे तिवारी जी के गले में। फिर क्या था, सुप्रीम कोर्ट के हथौड़े से बदन थरथरा उठा ‘जिअ हो बिहार का लाला,‘ खोल द सीलिंग का ताला’ वाला गाना गाना बजना बंद हो गया। नेतागिरी को ‘गुण्डागिरी’ बताने वालों की फौज सक्रिय हो उठी।
उधर सुप्रीम कोर्ट ने जब डांट पिलाई तो बगले झांकने लगे तिवारी जी! खबर आ रही है कि नेतागिरी छोड़कर ‘सीलिंग अफसर’ बनने वाले हैं। ‘अफसर बिटिया’ तो सुना था अब अब ‘अफसर बबुआ’ भी सुन लेंगे। खैर, सीलिंग से सकते में पड़े तिवारी जी कोर्ट में हाथ जोड़े खड़े थे, रुंधे गले से गाए जा रहे थे ‘हमसे भूल हो गई, हमका माफी देई दो।