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Thursday, January 22, 2026
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उत्तराखंड में जनवरी की गर्मी ने बढ़ाई चिंता, मौसम के बदले तेवर

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देवभूमि उत्तराखंड में इस साल सर्दियों का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। आमतौर पर जनवरी के महीने में जहां पहाड़ बर्फ की सफेद चादर से ढके रहते हैं और मैदानी इलाकों में शीतलहर चलती है, वहीं इस बार तेज धूप और बढ़ते तापमान ने लोगों को हैरान कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के अधिकतम तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे ऐसा लग रहा है मानो ठंड समय से पहले ही विदा हो गई हो।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की कमी और लंबे समय से बने शुष्क मौसम के कारण पहाड़ी इलाकों में धूप तीखी हो गई है। इससे ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और पर्यावरण पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

सामान्य से ऊपर पहुंचा तापमान

प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है। देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी इलाकों में दिन का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है, जो सामान्य से 4 से 6 डिग्री ज्यादा है। वहीं मसूरी, नैनीताल और मुक्तेश्वर जैसे हिल स्टेशनों पर भी दिन में तेज धूप खिली हुई है और ठंड केवल सुबह-शाम तक सीमित रह गई है।

ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बर्फबारी का इंतजार बना हुआ है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और औली जैसे इलाकों में इस बार उम्मीद के मुताबिक बर्फ नहीं गिर पाई है, जिससे पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ गई है।

मौसम में बदलाव के कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि इस असामान्य गर्मी के पीछे कई कारण हैं। इस साल हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहे, जिससे न तो पर्याप्त बारिश हुई और न ही बर्फबारी। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण पूरे हिमालयी क्षेत्र में तापमान बढ़ रहा है। उत्तर-पश्चिम से आने वाली शुष्क हवाओं ने वातावरण की नमी कम कर दी है, जिससे आसमान साफ है और सूरज की किरणें सीधे धरती को गर्म कर रही हैं।

खेती और स्वास्थ्य पर असर

मौसम के इस बदलाव का असर खेती और स्वास्थ्य दोनों पर दिखने लगा है। रबी की फसलों, खासकर गेहूं और मटर के लिए इस समय ठंड और हल्की बारिश जरूरी होती है। अधिक तापमान के कारण फसलें समय से पहले पक सकती हैं, जिससे पैदावार घटने का खतरा है। वहीं दिन में गर्मी और रात में ठंड के कारण सर्दी-खांसी, वायरल बुखार और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीज भी बढ़ रहे हैं।

इसके साथ ही सर्दियों में बर्फबारी कम होने से आने वाले समय में जल संकट की आशंका भी जताई जा रही है। यदि ग्लेशियरों और बर्फ से मिलने वाला पानी कम हुआ, तो गर्मियों में नदियों और जल स्रोतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है, तो तापमान में गिरावट आ सकती है। फिलहाल जनवरी की यह असामान्य गर्मी पर्यावरणविदों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही