
मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपनी रणनीति को नया रूप दे दिया है। अमेरिका और इजरायल के साथ जारी टकराव के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम अब खत्म होने जा रहा है। ऐसे में क्षेत्र में फिर से सैन्य गतिविधियां तेज होने की आशंका बढ़ गई है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम भूमिका निभा रहा है होर्मुज जलडमरूमध्य। यह संकरा समुद्री रास्ता दुनिया की तेल आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है, जहां से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल सप्लाई गुजरती है। यही वजह है कि ईरान अब इस जलमार्ग को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान ने किसी भी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित किया, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा और कई देशों में ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।
दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी देश भी इस स्थिति को लेकर सतर्क हैं। वे जानते हैं कि ईरान पर ज्यादा दबाव डालने से हालात और बिगड़ सकते हैं। यही कारण है कि कूटनीतिक स्तर पर भी संतुलन बनाने की कोशिश जारी है।
फिलहाल ईरान अपनी शर्तों पर कायम है और किसी भी दबाव में झुकने के संकेत नहीं दे रहा। वहीं सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये जैसे देश भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
अब जैसे ही युद्धविराम की अवधि समाप्त हो रही है, पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या हालात शांत होंगे या फिर यह टकराव और गहरा जाएगा। अगर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।













