
मध्य पूर्व में जारी तनाव अब और खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते टकराव के बीच खाड़ी देशों को सीधी चेतावनी दे दी है। ईरानी सशस्त्र बलों ने साफ कहा है कि अगर उन पर हमला हुआ, तो इसका जवाब सिर्फ दुश्मनों तक सीमित नहीं रहेगा।
ईरानी सेना की ‘विनाशकारी’ चेतावनी
ईरानी सशस्त्र बलों के केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी ने कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिकी धमकियों के बाद ईरान अब पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान के किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ, तो पलटवार केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन देशों के अहम ठिकानों को भी निशाना बनाया जाएगा, जहां अमेरिकी सेना मौजूद है।
ऊर्जा और आर्थिक ठिकानों पर खतरा
ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि वह उन सहयोगी देशों के तेल, गैस और आर्थिक केंद्रों को निशाना बना सकता है, जो अमेरिका को अपने यहां सैन्य बेस चलाने की अनुमति देते हैं।
खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता
ईरान के इस अल्टीमेटम के बाद खाड़ी देशों में चिंता बढ़ गई है। जोल्फागरी ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों को पनाह देने वाले देशों को “विनाशकारी हमलों” के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इन देशों को अपने यहां से अमेरिकी सेना को हटाने के लिए कदम उठाने चाहिए, वरना उन्हें भी इस युद्ध की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
वैश्विक संकट का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान ने अपने बयान के अनुसार ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया, तो दुनिया भर में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। पहले से ही क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित है और अब यह स्थिति बड़े सैन्य टकराव में बदल सकती है।
दुनिया की नजर हालात पर
संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल खाड़ी देशों और वॉशिंगटन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।













