
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों ने एक नई रणनीतिक ऊंचाई हासिल कर ली है। राजधानी में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दोनों देशों ने अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों के सह-विकास और सह-उत्पादन को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
यह बैठक नरेंद्र मोदी और अमेरिकी नेतृत्व के विजन के अनुरूप आयोजित की गई, जिसमें दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
जेट इंजन से ड्रोन तक अहम चर्चा
बैठक में कई अहम रक्षा परियोजनाओं की समीक्षा की गई। ‘iCET’ पहल के तहत GE F414 जेट इंजन के भारत में निर्माण पर संतोष जताया गया, जो स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA तेजस Mk2 की क्षमता को बढ़ाएगा।
इसके अलावा ‘स्ट्राइकर’ बख्तरबंद वाहनों के संयुक्त उत्पादन और MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन जैसे अत्याधुनिक ड्रोन पर भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
इस साझेदारी से भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को नई ताकत मिलेगी। अमेरिका द्वारा संवेदनशील रक्षा तकनीकों के हस्तांतरण (ToT) पर सहमति जताना एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
स्टार्टअप्स और इंडस्ट्री को मौका
‘INDUS-X’ पहल के तहत दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों के सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया है, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
इंडो-पैसिफिक में मजबूत होगी सप्लाई चेन
भारत और अमेरिका ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित और मजबूत रक्षा सप्लाई चेन बनाने पर भी सहमति जताई है। इससे वैश्विक संकट के समय भी हथियारों की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह साझेदारी भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उसे वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी।













