
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने देश की रसोई गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के तहत दो विशाल गैस टैंकर—शिवालिक और नंदा—भारी मात्रा में एलपीजी लेकर भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार ने इसके साथ ही गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ देशभर में सख्त अभियान भी शुरू कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक इन दोनों टैंकरों में कुल 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है, जो देश के करोड़ों घरों में रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए इन टैंकरों की आवाजाही और आपूर्ति श्रृंखला पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी संभावित बाधा से बचा जा सके।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक हालात चाहे जैसे भी हों, भारत में गैस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
कालाबाजारी के खिलाफ सख्त अभियान
गैस आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर भी कड़ा रुख अपनाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों ने देशभर में एक साथ छापेमारी अभियान शुरू किया है।
इस दौरान उन गैस एजेंसियों और बिचौलियों को चिन्हित किया जा रहा है जो कृत्रिम कमी पैदा कर गैस की कालाबाजारी करने की कोशिश कर रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाने और उनका लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सरकार ने लोगों से घबराने से किया मना
सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि गैस की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। अधिकारियों के अनुसार देश में एलपीजी का मौजूदा भंडार और आने वाली खेप किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए पर्याप्त है।
सरकार का कहना है कि देश में रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य बनी रहेगी और आम लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।













